

PM Formalisation of Micro food processing Enterprises scheme: अब तकदीर के पन्ने कोरे नहीं रहेंगे, बल्कि उन पर लिखी जाएगी सफलता की नई इबारत। बिहार के भागलपुर में कुछ ऐसी ही तस्वीर देखने को मिली, जहां सरकारी योजना की मशाल लेकर अधिकारी सीधे ग्रामीणों के द्वार पहुंचे और आत्मनिर्भरता का मंत्र फूंका।
भागलपुर जिले के सुल्तानगंज प्रखंड स्थित रघुचक अन्हार गांव में एक नई सुबह का आगाज हुआ। बिहार सरकार का उद्योग विभाग, जो लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की लौ जलाने का प्रयास कर रहा है, ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत एक विशेष जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि कैसे वे इस योजना का लाभ उठाकर अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।
PM Formalisation of Micro food processing Enterprises scheme: जानिए कैसे उठाएं योजना का लाभ?
कार्यशाला में पहुंचे उद्योग विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। उन्होंने विस्तार से समझाया कि कैसे कोई भी व्यक्ति इस योजना के माध्यम से अपना खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित कर सकता है। अधिकारियों ने केवल उद्योग लगाने तक की ही नहीं, बल्कि उसके बाद की चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उत्पादित माल को बाजार में कैसे बेचा जाए, उसकी ब्रांडिंग और पैकेजिंग कैसे की जाए ताकि ग्राहकों को आकर्षित किया जा सके। मौके पर जिला परियोजना प्रबंधक मोहम्मद शहजाद और जिला संसाधन सेवी कृष्ण कुमार सिंह ने ग्रामीणों के हर सवाल का जवाब दिया और उनकी शंकाओं का समाधान किया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
अधिकारियों ने ग्रामीणों में भरा जोश, कहा- खुद बनें मालिक
इस पूरे कार्यक्रम की निगरानी स्वयं उद्योग विभाग की महाप्रबंधक खुशबू कुमारी कर रही हैं, जो इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि वे नौकरी ढूंढने के बजाय खुद मालिक बनें और दूसरों को रोजगार देने की क्षमता विकसित करें। उन्होंने कहा कि सरकार हर कदम पर उनका साथ देने के लिए तैयार है, बस जरूरत है एक कदम आगे बढ़ाने की। यह कार्यशाला महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


