

Bhagalpur News: भागलपुर की गलियों में एक और जिंदगी का मीटर डाउन हो गया, उम्मीदों का पार्सल डिलीवर होने से पहले ही मौत ने दरवाजा खटखटा दिया। शहर के तातारपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत रेकाबगंज इलाके में एक ऑनलाइन फ़ूड डिलीवरी कंपनी में काम करने वाले युवक ने अपने किराये के कमरे में फांसी लगाकर जीवन लीला खत्म कर ली।
मृतक की पहचान बांका जिले के फुलीडुमर प्रखंड स्थित कदुआ गांव निवासी वरुण यादव के बेटे दीपक कुमार के तौर पर हुई है। जानकारी के अनुसार, दीपक पिछले कई महीनों से भागलपुर में रहकर जोमैटो में डिलीवरी बॉय का काम कर रहा था और रेकाबगंज में अकेले ही किराये के कमरे में रहता था।
Bhagalpur News: दो दिनों से नहीं उठ रहा था फोन, तब हुआ खुलासा
परिजनों ने बताया कि दीपक की बहन पिछले दो दिनों से लगातार उसे फोन कर रही थी, लेकिन जब उसकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया तो परिवार वालों की चिंता बढ़ गई। उन्होंने फौरन भागलपुर में रहने वाले एक रिश्तेदार को दीपक के कमरे पर जाकर हालचाल लेने के लिए भेजा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। रिश्तेदार जब कमरे पर पहुंचा तो दरवाजा अंदर से बंद था।

काफी देर तक दरवाजा खटखटाने और आवाज लगाने के बाद भी जब अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो अनहोनी की आशंका से दरवाजा तोड़ा गया। अंदर का मंजर देखकर सभी के होश उड़ गए। दीपक का शव पंखे से लटका हुआ था, जिसके बाद तत्काल तातारपुर थाना पुलिस को घटना की सूचना दी गई।
पुलिस ने शुरू की मामले की जांच, हर एंगल पर नजर
घटना की सूचना मिलते ही तातारपुर थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। यह मामला अब Bhagalpur News की सबसे दुखद घटनाओं में से एक बन गया है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और कमरे की तलाशी लेकर जांच शुरू कर दी है। आसपास के लोगों से पूछताछ में पता चला कि दीपक पिछले कुछ दिनों से काफी परेशान और मानसिक तनाव में दिख रहा था, लेकिन उसने अपनी परेशानी किसी से साझा नहीं की थी।
पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह आत्महत्या का मामला लग रहा है, लेकिन इसके पीछे की असल वजह क्या है, इसका पता जांच के बाद ही चलेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पुलिस मृतक के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स भी खंगाल रही है ताकि कोई सुराग मिल सके। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस घटना के बाद मृतक के परिवार में कोहराम मच गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।




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