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मार्च, 9, 2026
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Bhagalpur News: पटना में गरजेगीं रसोइया, Mid Day Meal Scheme पर सरकार को घेरने की तैयारी, 10 हजार मानदेय समेत कई मांगें

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Mid Day Meal Scheme: सियासत की आंच पर पक रही है बिहार की खिचड़ी, लेकिन अपना निवाला मांगने और हक की आवाज बुलंद करने के लिए ‘रसोइया माताएं’ सड़क पर उतरने को तैयार हैं। 24 फरवरी 2026 को पटना के गर्दनीबाग में मुख्यमंत्री के समक्ष बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ के आह्वान पर एक विशाल प्रदर्शन का आयोजन किया गया है, जिसमें राज्य भर से विद्यालय रसोइया शामिल होंगी।

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Mid Day Meal Scheme: बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपनी मांगों को लेकर राज्य भर की विद्यालय रसोइया 24 फरवरी, 2026 को पटना के गर्दनीबाग में मुख्यमंत्री के समक्ष विशाल प्रदर्शन करेंगी। इस राज्यव्यापी प्रदर्शन की तैयारी को लेकर भागलपुर के नाथनगर, जगदीशपुर और शाहकुंड जैसे प्रखंडों में रसोइयों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है और बैठकें आयोजित की जा रही हैं।

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क्यों Mid Day Meal Scheme से जुड़ी रसोइया हैं नाराज?

विद्यालय रसोइयों की नाराजगी के पीछे कई बड़ी वजहें हैं। वे लंबे समय से अपनी मांगों को सरकार के सामने रख रही हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

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  • लेबर कोड कानूनों को रद्द किया जाए।
  • मासिक मानदेय बढ़ाकर 10,000 रुपये किया जाए।
  • उन्हें सरकारी कर्मी का दर्जा दिया जाए।
  • पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ दिए जाएं।
  • मातृत्व अवकाश और विशेष अवकाश का प्रावधान हो।
  • मध्याह्न भोजन योजना से गैर-सरकारी संगठनों (NGO) को बाहर किया जाए।
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संघ के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त ने कहा कि न्यूनतम मजदूरी से भी बहुत कम मानदेय पर काम करने वाली इन महिलाओं को कोई सुविधा नहीं मिलती है। उन्होंने आरोप लगाया, “सरकार रसोइयों को सामाजिक सुरक्षा तो दूर, ड्रेस तक मुहैया नहीं कराती। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उल्टे एनजीओ को बढ़ावा देकर उनका काम छीना जा रहा है और बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। एनजीओ द्वारा दिए जाने वाले घटिया भोजन से बच्चों के बीमार होने की खबरें आम हो चुकी हैं।”

मुकेश मुक्त ने आगे कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण राज्य में रसोइयों की संख्या घटती जा रही है। उन्होंने विधानसभा के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पांच साल पहले जहां ढाई लाख रसोइया थीं, वहीं अब केवल दो लाख बची हैं। पचास हजार महिलाओं से उनका रोजगार छीन लेना महिला सशक्तिकरण के दावों की पोल खोलता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

“सरकार कर रही है न्यूनतम मजदूरी का शोषण”

संघ की संयोजक पूनम देवी ने कहा कि चुनाव से पहले वोट के लिए मानदेय में मामूली बढ़ोतरी की गई, लेकिन अब वह भी समय पर नहीं मिलता। उन्होंने बताया, “सरकार द्वारा घोषित 541 रुपये प्रतिदिन की न्यूनतम मजदूरी के मुकाबले रसोइयों को मात्र 92 रुपये प्रतिदिन दिए जा रहे हैं, जो कि एक मजाक है। यह मानदेय भी साल में केवल 10 महीने ही मिलता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सरकार खुद ही न्यूनतम मजदूरी कानून का मखौल उड़ा रही है।”

उन्होंने यह भी कहा कि रसोइयों पर काम का बोझ लगातार बढ़ाया जा रहा है और उनसे स्कूल में झाड़ू लगवाने से लेकर शौचालय साफ करवाने तक के काम लिए जाते हैं। इस प्रदर्शन की तैयारी के लिए पूनम देवी, इंदु देवी, रानी देवी, और गीता देवी समेत कई नेत्री गांवों में प्रचार-प्रसार कर रही हैं। भागलपुर से भी बड़ी संख्या में विद्यालय रसोइया इस प्रदर्शन में शामिल होंगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। 24 फरवरी को पटना में होने वाला यह प्रदर्शन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

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