

National Youth Parliament: राजनीति की नर्सरी से जब कोई युवा हुंकार भरता है, तो उसकी गूंज दूर तक जाती है। कुछ ऐसी ही गूंज महाराष्ट्र के नागपुर में सुनाई दी, जहां बिहार के एक लाल ने अपने तर्कों से पूरे सदन को सोचने पर मजबूर कर दिया।
भागलपुर के होनहार छात्र शिव सागर ने नागपुर के विधान भवन में आयोजित राष्ट्रीय पर्यावरणीय युवा संसद में बिहार का झंडा बुलंद किया। 14 और 15 फरवरी को हुए इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में उन्होंने सरकार की विकास नीतियों को लेकर ऐसे तथ्यपूर्ण और गंभीर सवाल उठाए कि सत्ता पक्ष को भी जवाब देना मुश्किल हो गया। इस कार्यक्रम में उन्हें विपक्ष के सांसद की भूमिका दी गई थी, जिसे उन्होंने पूरी जिम्मेदारी और प्रभाव के साथ निभाया।
National Youth Parliament में बिहार की उपेक्षा का मुद्दा गूंजा
शिव सागर, जो तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) की प्रतिष्ठित इकाई मारवाड़ी महाविद्यालय में राजनीति विज्ञान के छात्र हैं, ने अपने संबोधन की शुरुआत एक चुभते हुए सवाल से की। भागलपुर जिले के पीरपैंती निवासी शिव सागर ने कहा कि यह एक स्थापित सत्य है कि देश की सत्ता का रास्ता बिहार से होकर गुजरता है, लेकिन जब विकास की बात आती है, तो वही बिहार प्राथमिकताओं की सूची में सबसे नीचे क्यों चला जाता है? आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे भेदभाव पर भी सदन का ध्यान आकर्षित किया।
उन्होंने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार की सराहना की, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठाया कि उसी के समानांतर गौरवशाली इतिहास वाले विक्रमशिला विश्वविद्यालय की उपेक्षा क्यों की जा रही है? उन्होंने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार से नैतिक जवाबदेही की मांग की। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
बाढ़-सुखाड़ से लेकर विक्रमशिला की अनदेखी तक, हर मुद्दे पर सरकार को घेरा
पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक विषय पर बोलते हुए शिव सागर ने अपनी बात को बिहार की जमीन से जोड़ दिया। उन्होंने COP-30 जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों का जिक्र करते हुए कहा कि इन बहसों का तब तक कोई मतलब नहीं है, जब तक बिहार के किसानों की समस्याओं, उत्तर बिहार की विनाशकारी बाढ़ और दक्षिण बिहार के सूखे को राष्ट्रीय नीति निर्माण का केंद्र नहीं बनाया जाता। उनका तर्क था कि स्थानीय पर्यावरणीय चुनौतियों को समझे बिना वैश्विक समाधान अधूरे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अपने भाषण के अंत में उन्होंने एक मार्मिक अपील की। उन्होंने कहा कि चुनावी दौरों और वादों से आगे बढ़कर अब विकास के ठोस प्रयास करने का समय है। उन्होंने आग्रह किया कि विपक्ष को केवल विरोधी न मानकर एक सहभागी के रूप में देखा जाए, ताकि विकसित भारत का संकल्प gemeinsam पूरा किया जा सके। उनके इस भाषण की पूरे सदन में काफी प्रशंसा हुई। शिव सागर ने अपनी बातों से यह साबित कर दिया कि बिहार के युवाओं में न केवल प्रतिभा है, बल्कि अपने राज्य और देश के भविष्य के लिए एक स्पष्ट दृष्टिकोण भी है।



