

Bihar Waterways: नदियों की लहरों पर अब सिर्फ नावें नहीं, विकास की नई गाथा भी बहेगी। बिहार में जलमार्गों के माध्यम से माल ढुलाई के एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगा।
Bihar Waterways: बिहार में गंगा-कोसी समेत सात राष्ट्रीय जलमार्गों को मिली हरी झंडी, अब पानी के जहाज करेंगे माल ढुलाई
Bihar Waterways: सस्ती ढुलाई से आर्थिक क्रांति की ओर बिहार
बिहार में अब बालू, सीमेंट, और पत्थर चिप्स जैसे भारी सामानों की ढुलाई सड़कों या रेलमार्गों के बजाय पानी के जहाजों से की जाएगी। गंगा और कोसी नदी सहित बिहार में घोषित सात राष्ट्रीय जलमार्गों का व्यापक विकास किया जाएगा। इस योजना पर मुहर केरल के कोच्चि में आयोजित इनलैंड वाटरवेज डेवलपमेंट काउंसिल (आईडब्ल्यूडीसी) की तीसरी बैठक में लगी, जहां बिहार के परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने राज्य की जलमार्ग क्षमताओं और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जलमार्ग, सड़क और रेल परिवहन की तुलना में एक बेहद किफायती विकल्प है। माल ढुलाई की औसत लागत जलमार्ग से केवल 1.3 रुपये प्रति टन किलोमीटर आती है, जबकि रेल मार्ग से यह 2.41 रुपये और सड़क मार्ग से 3.62 रुपये है। इससे न केवल परिवहन लागत में कमी आएगी, बल्कि सड़कों पर 30-40 प्रतिशत तक यातायात का दबाव भी कम होगा, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मंत्री ने आगे स्पष्ट किया कि गंगा, गंडक, कोसी और सोन जैसी राज्य की प्रमुख नदियों का उपयोग बालू, सीमेंट, पत्थर चिप्स और अन्य भारी सामग्रियों की आवाजाही के लिए किया जाएगा। जलमार्ग विशेष रूप से ऐसे भारी सामानों और बिजली संयंत्रों के उपकरणों की ढुलाई के लिए सबसे सस्ता और प्रभावी माध्यम साबित होता है। इस महत्वाकांक्षी योजना से राज्य में अंतर्देशीय व्यापार को महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मिलेगा और हजारों नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके अतिरिक्त, यह पहल पुलों पर भीड़भाड़ को कम करेगी, सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से बचाएगी और पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी लाएगी।
राज्य में औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
परिवहन मंत्री ने बताया कि इन नदियों के किनारे उन संभावित स्थानों पर उद्योग स्थापित किए जाएंगे, जहां अंतर्देशीय जल परिवहन (आईडब्ल्यूटी) टर्मिनल बनाए जाएंगे। इससे बिहार से सीधे निर्यात-आयात की सुविधा मिल सकेगी। ये टर्मिनल नेपाल से जुड़ने की क्षमता भी रखते हैं, जिससे क्षेत्रीय व्यापार को एक बड़ी गति मिलेगी और आर्थिक संबंधों को मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, सोनपुर के कालुघाट पर विकसित मल्टीमॉडल टर्मिनल की क्षमता प्रतिवर्ष 77 हजार कंटेनर लोड-अनलोड करने की है। यह टर्मिनल एक साथ दो मालवाहक जहाजों को ठहरने की सुविधा प्रदान करता है। यहां कंटेनरों को सुरक्षित रखने, उनका वजन मापने और जल-रेल-सड़क कनेक्टिविटी जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। कालुघाट में एक लॉजिस्टिक पार्क का निर्माण भी प्रगति पर है, जिससे सुरक्षित भंडारण की सुविधा भी जल्द ही उपलब्ध हो जाएगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह परियोजना बिहार के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकती है।

