

Bhagalpur News: कानून के लंबे हाथ जब किसी अफसर के गिरेबान तक पहुंचते हैं, तो कहानी दूर तक जाती है। भागलपुर में कुछ ऐसा ही हुआ है, जहां एक अंचल अधिकारी पर सीधे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना का गंभीर आरोप लगा है और मामला अब सीजीएम कोर्ट की दहलीज पर पहुंच चुका है।
मामला भागलपुर के जगदीशपुर अंचल से जुड़ा है, जहां के अंचलाधिकारी (CO) सतीश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CGM) की अदालत में एक नालसी मुकदमा दायर किया गया है। यह मुकदमा भागलपुर के मानिक सरकार घाट रोड निवासी तपन विश्वास ने सिविल कोर्ट के जाने-माने अधिवक्ता आलय बनर्जी के माध्यम से दायर करवाया है। मुकदमे में जगदीशपुर के सीओ सतीश कुमार के साथ-साथ विपक्षी नूतन मिश्रा समेत कुछ अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
Bhagalpur News: क्यों पहुंचा मामला कोर्ट तक?
अधिवक्ता आलय बनर्जी के अनुसार, पूरा मामला एक बेशकीमती जमीन के टुकड़े से जुड़ा है। आरोप है कि लगभग सतासी कट्ठा जमीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट और सब जज, भागलपुर द्वारा एक आदेश पारित किया गया था। लेकिन जगदीशपुर के सीओ सतीश कुमार ने उस आदेश की पूरी तरह से अवहेलना की। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने कथित तौर पर विपक्षियों के साथ मिलीभगत करके उस बेशकीमती जमीन का म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) कर दिया और उनके नाम से रसीद भी जारी कर दी। यह एक गंभीर जमीन विवाद का मामला है, जिसमें सीधे तौर पर न्यायालय के आदेश को दरकिनार किया गया है।
दायर मुकदमे में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सीओ ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए और अदालती आदेश की गरिमा को ठेस पहुंचाते हुए यह कदम उठाया। इस कार्रवाई से वादी पक्ष को भारी नुकसान का अंदेशा है, जिसके चलते उन्हें न्याय के लिए एक बार फिर कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
अधिकारी पर मिलीभगत के गंभीर आरोप
वादी तपन विश्वास ने आरोप लगाया है कि सीओ सतीश कुमार ने जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी की है। उनका कहना है कि विपक्षियों से अनुचित लाभ लेकर इस पूरे मामले को अंजाम दिया गया है। जब न्यायालय का स्पष्ट आदेश था, तो फिर किस आधार पर म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी की गई, यह एक बड़ा सवाल है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस मामले के सामने आने के बाद भागलपुर के प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है।
अब सबकी निगाहें सीजीएम कोर्ट पर टिकी हैं कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है। यदि आरोप साबित होते हैं, तो यह न केवल जगदीशपुर सीओ के लिए एक बड़ी मुश्किल खड़ी करेगा, बल्कि यह प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक नजीर भी बनेगा कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना का परिणाम क्या हो सकता है। फिलहाल कोर्ट मामले की सुनवाई करेगा और आगे की प्रक्रिया तय करेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



