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मार्च, 5, 2026
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Bhagalpur News: 10 नौनिहालों के सिर सजा दस्तार-ए-फ़ज़ीलत का ताज, मदरसा अबू बकर सिद्दीक़ में जश्न का माहौल

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Bhagalpur News: इल्म की रोशनी से जब ज़ेहन रौशन होते हैं, तो माहौल ख़ुद-ब-ख़ुद नूरानी हो जाता है। भागलपुर के बरहपुरा स्थित मदरसा हज़रत अबू बकर सिद्दीक़ (रज़ि.) में 1 फ़रवरी 2025 को कुछ ऐसा ही रूहानी मंज़र देखने को मिला, जब दस छात्रों के सिर पर दस्तार-ए-फ़ज़ीलत का ताज सजाया गया।यह अवसर था मदरसे के वार्षिक दस्तारबंदी समारोह का, जो अत्यंत गरिमामय और यादगार माहौल में संपन्न हुआ। इस मुबारक मौके पर उन दस ख़ुशनसीब छात्रों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने इस वर्ष पवित्र क़ुरआन-ए-पाक को कंठस्थ करने का गौरव हासिल किया। प्रतिष्ठित उलेमा-ए-किराम ने अपने मुबारक हाथों से इन छात्रों की दस्तारबंदी की, जिससे पूरा माहौल रूहानियत से भर गया।Bhagalpur News: 10 नौनिहालों के सिर सजा दस्तार-ए-फ़ज़ीलत का ताज, मदरसा अबू बकर सिद्दीक़ में जश्न का माहौल

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Bhagalpur News: 8 वर्षों में 72 हाफ़िज़-ए-क़ुरआन तैयार, सीमित संसाधनों में बड़ी उपलब्धि

समारोह को संबोधित करते हुए मदरसे के नायब मोहतमिम मुफ़्ती मुहम्मद अफ़्फ़ान अब्बासी साहब ने मदरसे की आठ वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद मदरसे ने मात्र आठ सालों में 72 हाफ़िज़-ए-क़ुरआन तैयार किए हैं, जबकि यहां छात्रों की कुल संख्या कभी सौ से अधिक नहीं रही। यह सफलता शिक्षकों के अथक परिश्रम और संस्था की निष्ठा का उज्ज्वल प्रमाण है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।इस दौरान हाफ़िज़-ए-क़ुरआन बने छात्रों को इनाम और सम्मान देकर उनकी हौसला-अफ़ज़ाई की गई, जिससे वहां मौजूद अन्य छात्रों में भी उत्साह का माहौल देखने को मिला।

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दीनी तालीम के साथ आधुनिक शिक्षा का संगम

मुफ़्ती साहब ने आगे बताया कि मदरसे में हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन के साथ-साथ छात्रों को हिंदी, अंग्रेज़ी और गणित की नियमित शिक्षा भी दी जाती है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र दीनी तालीम के साथ-साथ आधुनिक ज़रूरतों से भी जुड़ सकें। उन्होंने बताया कि बेहतर मदरसा शिक्षा प्रदान करने के इसी क्रम में जल्द ही कंप्यूटर कक्षाओं की शुरुआत करने की भी योजना है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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हाफ़िज़-ए-क़ुरआन की फ़ज़ीलत पर डाला गया प्रकाश

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि क़ारी मसऊद साहब ने अपने प्रभावशाली संबोधन में क़ुरआन कंठस्थ करने के महत्व और उसके व्यक्तिगत एवं सामाजिक लाभों पर प्रकाश डाला। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने कहा कि अहले-क़ुरआन का मक़ाम और प्रतिष्ठा बहुत ऊंची होती है। वहीं, मुफ़्ती ख़ुर्शीद अनवर क़ासमी साहब ने कहा कि हर साल नियमित रूप से दस-दस हाफ़िज़ों का तैयार होना मदरसा हज़रत अबू बकर सिद्दीक़ की शैक्षिक सफलता और मज़बूत प्रबंधन की स्पष्ट गारंटी है।इस मौके पर मुफ़्ती सैयद शाह सलमान साहब ने हाफ़िज़-ए-क़ुरआन, उनके अभिभावकों और शिक्षकों को दिल से मुबारकबाद दी। समारोह के समापन पर प्रोफ़ेसर परवेज़ अख़्तर साहब ने सभी विशिष्ट अतिथियों, उलेमा-ए-किराम और उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया। इस रूहानी और शैक्षिक कार्यक्रम को सफल बनाने में मुफ़्ती सैफ़ुल्लाह, क़ारी अरशद, क़ारी असदक़, हसन इमाम, और हाफ़िज़ शाहिद सिद्दीकी समेत कई अन्य लोगों का सराहनीय योगदान रहा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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