भागलपुर न्यूज़: बिहार के भागलपुर में देर रात, सुनसान रास्ते पर हुए एक खौफनाक हमले ने इलाके में दहशत फैला दी है। वन विभाग के एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर और उनके भाई पर न केवल जानलेवा हमला हुआ, बल्कि बदमाशों ने लोहे की रॉड और धारदार हथियारों से उनके सिर फोड़ दिए और कीमती मोबाइल फोन व सोने का लॉकेट लूटकर फरार हो गए। इस वारदात ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब पीड़ित पक्ष ने हमलावरों की पहचान का दावा किया है।
सुनसान रास्ते पर घात लगाकर हमला
भागलपुर जिले के नाथनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत दोगछी गांव में यह दिल दहला देने वाली घटना घटी है। वन विभाग में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (एएसआई) के पद पर तैनात विकास यादव और उनके भाई नीतीश कुमार बदमाशों का निशाना बने। विकास यादव मूल रूप से मधुसूदनपुर थाना क्षेत्र के मनोहरपुर नवटोलिया गांव के निवासी हैं। घटना के संबंध में विकास ने बताया कि वह अपनी बहन के घर दोगछी नवटोलिया आए हुए थे। इसी दौरान, पास के गांव में आयोजित एक यज्ञ देखने के लिए वह अपने भाई नीतीश के साथ गए थे।यज्ञ से लौटते समय, उनका भतीजा अचानक मेले में कहीं खो गया। भतीजे की तलाश में दोनों भाई वापस फतेहपुर गांव की ओर निकले। रात का अंधेरा और सुनसान रास्ता, यही वह मौका था जब पांच बेखौफ बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। बदमाशों ने पहले नीतीश कुमार को निशाना बनाया और उनसे बाइक छीनने का प्रयास किया। जब नीतीश ने इसका विरोध किया, तो बदमाशों ने उनकी बेरहमी से पिटाई कर दी।
भाई को बचाने आए ASI पर भी वार
नीतीश कुमार पर हमला होता देख, पीछे से आ रहे विकास यादव तुरंत अपने भाई को बचाने के लिए आगे बढ़े। लेकिन बदमाशों ने उन पर भी हमला बोल दिया। पांचों अपराधियों ने लोहे के रॉड और धारदार हथियारों से दोनों भाइयों के सिर पर कई वार किए, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। विकास यादव के शरीर पर धारदार हथियार के कई गहरे घाव के निशान भी बने हैं। इस हमले के बाद, बदमाशों ने विकास यादव से उनका एंड्रॉयड मोबाइल फोन और गले से सोने का लॉकेट छीन लिया और मौके से फरार हो गए।
बदमाशों की हुई पहचान, पुलिस अब भी खामोश?
हमले के बाद, गंभीर रूप से घायल दोनों भाइयों को आनन-फानन में एक स्थानीय क्लिनिक में ले जाया गया, जहाँ उनका प्राथमिक उपचार किया गया। इस घटना के बाद, पीड़ित विकास यादव ने शनिवार को अपने सहयोगियों और रिश्तेदारों की मदद से हमलावर बदमाशों की पहचान करने का दावा किया है। पीड़ित पक्ष का यह भी कहना है कि पहचान किए गए बदमाशों में से एक ने अपनी करतूत को स्वीकार भी कर लिया है।हालांकि, इस गंभीर मामले में अब तक नाथनगर थाने में कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है, जो अपने आप में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। नाथनगर थानाध्यक्ष राजीव रंजन सिंह ने इस संबंध में बताया कि पीड़ित की ओर से लिखित शिकायत मिलते ही, आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब पीड़ित पक्ष ने बदमाशों की पहचान कर ली है, तो औपचारिक शिकायत दर्ज कराने में देरी क्यों हो रही है और पुलिस स्वतः संज्ञान क्यों नहीं ले रही है? यह देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।





