

Gandhi Martyrdom Day: एक ऐसा दिन, जब सत्य और अहिंसा के पुजारी का लहू बहा, और देश ने अपने बापू को खो दिया। यह सिर्फ एक व्यक्ति की शहादत नहीं, बल्कि उन मूल्यों की अग्निपरीक्षा थी जिन पर भारत की नींव रखी गई।
शुक्रवार को, Gandhi Martyrdom Day के अवसर पर, कहलगांव के कागजी टोला में एक मार्मिक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। परिधि संस्था द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, महिलाओं, छात्रों और युवाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य महात्मा गांधी के बलिदान और उनके आदर्शों को याद करना था।
सभा को संबोधित करते हुए राहुल ने बताया कि गणतंत्र दिवस से लेकर गांधी शहादत दिवस तक, संस्था लगातार ग्रामीणों, महिलाओं, छात्रों और युवाओं के बीच भारतीय गणतंत्र के महत्व और महात्मा गांधी के अविस्मरणीय योगदान पर चर्चा कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत सैकड़ों धार्मिक, सामाजिक, क्षेत्रीय और सांस्कृतिक परंपराओं का एक अनूठा संगम है, और इस विविधता को एकजुट रखना ही सच्ची देशभक्ति है। आजादी के समय, देशवासियों ने एक-दूसरे के सम्मान, समानता, न्याय, समान अवसर और लोकतंत्र का संकल्प लिया था, जिसने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनने में मदद की। इस अवसर पर आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
राहुल ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि राष्ट्रपिता के आदर्श आज भी हमें राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए प्रेरित करते हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
गांधी के विचारों की प्रासंगिकता और वर्तमान चुनौतियाँ
राहुल ने मौजूदा चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हाल के दिनों में भाषा, नस्ल और धर्म के नाम पर घृणा फैलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। यदि इस तरह की विभाजनकारी हिंसा को नहीं रोका गया, तो देश की एकता और अखंडता को गंभीर खतरा हो सकता है। गांधीजी ने बहुत पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि एक विशाल देश को एक साथ रखने के लिए आपसी विश्वास, समानता और प्रेम अत्यंत आवश्यक हैं। उनके विचार आज भी राष्ट्रीय एकता के लिए प्रेरणास्रोत हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
महात्मा गांधी की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए जय नारायण ने दुख व्यक्त किया कि देश के ही एक व्यक्ति द्वारा बापू की हत्या से पूरी दुनिया में भारत को शर्मसार होना पड़ा था। उन्होंने कहा कि गांधीजी ने जाति भेद, छुआछूत और धार्मिक द्वेष के खिलाफ अथक संघर्ष किया था ताकि देश को एकजुट किया जा सके, लेकिन कुछ ताकतें धर्म के आधार पर असमानता वाला राष्ट्र बनाना चाहती थीं। जबकि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का सपना एक धर्मनिरपेक्ष और वैज्ञानिक सोच से भरा भारत था।
योगेंद्र साहनी ने गांधीजी को आने वाली कई सदियों तक मानवता को सही राह दिखाने वाला ‘ज्योति पुंज’ बताया। वहीं, जितेंद्र कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि भले ही गांधी के शरीर की हत्या कर दी गई हो, लेकिन उनके विचार आज भी सत्य और मानवता के लिए समर्पित लोगों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
इस अवसर पर विनय कुमार ने सामाजिक विषमताओं के खिलाफ एक प्रेरणादायक गीत प्रस्तुत किया और समुदाय व छात्रों से गांधीवादी मार्ग पर चलने का आह्वान किया। अरविंद कुमार ने कहा कि यह शहादत दिवस हमें याद दिलाता है कि यदि हम आजादी के आंदोलन के मूल मूल्यों को नहीं समझेंगे, तो नफरत और हिंसा हमारे समाज को विनाश की ओर धकेल देगी। कार्यक्रम में राहुल, रोहित कुमार सिंह, प्रीतम कुमार, जय नारायण, अरविंद कुमार, सुकुमार मंडल, सुबोध सहनी, बिरजू, सुनील सहनी, सत्यनारायण सहनी, संजय सहनी, अजय सहनी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। यह जानकारी आपको देशज टाइम्स की ओर से दी जा रही है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



