
लेबर कोड: देश में मजदूर विरोधी चार लेबर कोड कानूनों के विरोध में मजदूरों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) से जुड़े मजदूरों ने बिहार के भागलपुर में ‘काला दिवस’ मनाते हुए इन कानूनों को वापस लेने की मांग की है। मजदूरों ने केंद्र सरकार पर पूंजीपतियों के लिए काम करने और मजदूर हितों को कुचलने का आरोप लगाया।
मजदूर अधिकारों की रक्षा के लिए अपने अभियान को तेज करते हुए, ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) ने गुरुवार को भागलपुर के नाथनगर, जगदीशपुर और शाहकुंड प्रखंड के कई गांवों में मजदूरों के साथ बैठकें कीं। इन बैठकों में मजदूरों को ‘विनाशकारी लेबर कोड’ की विस्तृत जानकारी दी गई और उन्हें बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन तथा असंगठित कामगार महासंघ की सदस्यता दिलाई गई। इस दौरान, मजदूरों ने सामाजिक सुरक्षा में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ भी एकजुट होकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
‘लेबर कोड’ के खिलाफ मजदूरों का आक्रोश: केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप
ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त ने नाथनगर प्रखंड के तेतराहार में मजदूरों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र की मोदी सरकार देश के लिए एक गंभीर खतरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चार ‘लेबर कोड’ के जरिए मजदूरों के दशकों के संघर्ष से हासिल अधिकारों को छीना जा रहा है। मुकेश मुक्त ने यह भी कहा कि किसानों की जमीन जबरन छीनी जा रही है और झूठे विकास के नाम पर उन्हें उजाड़ा जा रहा है। उन्होंने जोर दिया कि मजदूरों, किसानों और आम नागरिकों के हितों को कुचलते हुए पूंजीपतियों और कॉरपोरेट घरानों के पक्ष में नीतियां बनाई जा रही हैं। दलितों, वंचितों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर लगातार हमले बढ़ रहे हैं। यह ‘देश विरोधी’ मोदी सरकार सिर्फ अपने कॉरपोरेट-पूंजीपति आकाओं के लिए काम करती है, इन्हें देश के मजदूरों और आम नागरिकों की कोई चिंता नहीं है।
सामाजिक सुरक्षा में भ्रष्टाचार का भंडाफोड़: अधिकारी और सरकार खामोश
स्थानीय स्तर पर अभियान का नेतृत्व कर रहे ऐक्टू के संयुक्त जिला सचिव राजेश कुमार ने कहा कि लेबर कार्यालय मजदूरों की कोई सुनवाई नहीं करता, यह भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। उन्होंने बताया कि मजदूरों के सामाजिक सुरक्षा में भारी लूट मची हुई है। मजदूरों को परेशान करने के लिए निबंधन और नवीकरण की नियमावली में हर दिन बदलाव किए जा रहे हैं। ऐप अपडेट करने के नाम पर मजदूरों के अधिकार छीने जा रहे हैं और उन्हें सामाजिक सुरक्षा के लाभ से वंचित किया जा रहा है। राजेश कुमार ने आगे कहा कि निर्माण मजदूरों के निबंधन और सामाजिक सुरक्षा वितरण प्रक्रिया में निचले स्तर के अधिकारियों को शामिल किए जाने से भ्रष्टाचार काफी बढ़ गया है। मजदूरों को लूट और ठगी का शिकार होने के लिए बाजार के भरोसे छोड़ दिया गया है, जिससे उनके अंदर आक्रोश बढ़ रहा है। लेकिन उच्च अधिकारी और सरकार इस पर खामोश हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मजदूरों की समस्याओं का शीघ्र निराकरण नहीं हुआ तो हर स्तर पर मजदूरों का गुस्सा फूटेगा।
इन गांवों में मजदूरों ने ली यूनियन की सदस्यता
इस कार्यक्रम में बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन के अंकित राज, सुभाष यादव, संजय दास, धनंजय दास, बीरेंद्र यादव, मनोज यादव, दिनेश यादव, नीलम यादव, विपिन यादव, गुड्डू कुमार यादव, राजू पंडित, घनन कुमार, गिरिश यादव, रोशन कुमार, लेखिया देवी, आरती देवी, चांदनी देवी, मुन्नी देवी, असंगठित कामगार महासंघ के बबीता देवी, सजनी देवी, अनीता देवी, कैलाश शर्मा, जनार्दन ठाकुर, रूपा कुमारी, खुशबू कुमारी, बिहारी साह, गया मंडल, विलास सिंह, सिंहेश्वर मंडल, नेहा कुमारी, कंचन देवी, उषा देवी, सोनी देवी सहित बड़ी संख्या में महिला और पुरुष मजदूर शामिल हुए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
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