
लेबर कोड: अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर देशभर में मजदूरों ने अपनी एकता और ताकत का प्रदर्शन किया। भागलपुर में भी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने कॉर्पोरेट-परस्त लेबर कोड और मजदूर अधिकारों पर हो रहे हमलों के खिलाफ जोरदार मार्च निकाला, जिसमें हजारों की संख्या में मजदूर शामिल हुए। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा।
लेबर कोड के विरोध में विशाल मार्च
हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों – ऐक्टू (AICCTU), सीटू (CITU) और एटक (AITUC) ने भागलपुर में कॉर्पोरेटपरस्त लेबर कोड और मजदूर अधिकारों पर लगातार हो रहे हमलों के खिलाफ एक विशाल विरोध मार्च निकाला। यह मार्च स्थानीय घंटाघर चौक से शुरू हुआ और लाल झंडे व बैनरों के साथ खलीफाबाग, मुख्य बाजार के रास्ते स्टेशन चौक पहुंचा, जहां एक सभा का आयोजन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने “मजदूर दिवस जिंदाबाद”, “दुनिया के मजदूरों एक हो”, “लेबर कोड रद्द करो”, “मजदूर अधिकारों पर हमला बन्द करो”, “मजदूरी की लूट बंद करो” जैसे नारों के साथ अपनी आवाज बुलंद की। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। मार्च का नेतृत्व ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त, एटक के जिला महासचिव डॉ. सुधीर शर्मा और सीटू के जिला सचिव दशरथ प्रसाद ने किया।
मजदूर आंदोलन की प्रमुख मांगें
सभा को संबोधित करते हुए मजदूर संगठनों के नेताओं ने मोदी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार ने मजदूर विरोधी चार लेबर कोड लागू कर यह सपना देखा था कि इससे मजदूरों का संघर्ष और ट्रेड यूनियन खत्म हो जाएंगे। नेताओं ने आरोप लगाया कि 1 अप्रैल से लेबर कोड लागू करने का कदम सरकार के अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। उत्तर भारत में मजदूर आंदोलन लगातार बढ़ता जा रहा है, और मजदूर लेबर कोड के क्रूर पहलुओं के खिलाफ खड़े हो रहे हैं। यह आंदोलन पूंजीवादी शोषण, भुखमरी की मजदूरी, मजदूरी की चोरी, 12 घंटे या उससे अधिक काम और 8 घंटे से ज्यादा ओवरटाइम के लिए दोगुनी मजदूरी की मांग को लेकर मजदूरों के गुस्से का सिलसिला है।
अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर मजदूरों ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं:
- मोदी के कॉर्पोरेटपरस्त लेबर कोड्स को तुरंत रद्द किया जाए।
- न्यूनतम मजदूरी 1500 रुपये प्रतिदिन या 42000 रुपये मासिक घोषित की जाए।
- 12 घंटे काम करने की व्यवस्था को समाप्त किया जाए और 8 घंटे से ज्यादा ओवरटाइम काम के लिए दोगुनी मजदूरी की गारंटी दी जाए।
- कॉन्ट्रैक्ट, मानदेय, डेली वेज, अप्रेंटिसशिप, ट्रेनी, फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट का सिस्टम खत्म किया जाए और इस तरह के सभी मजदूरों को परमानेंट किया जाए।
- निर्माण मजदूरों के निबंधन व सामाजिक सुरक्षा में व्याप्त भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए।
- सरकारी कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम (ओपीएस) तत्काल लागू की जाए।
- निजीकरण पर रोक लगाई जाए और सार्वजनिक उद्यमों को बेचना बंद किया जाए।
सरकार को सीधी चेतावनी और आगे की रणनीति
मजदूर नेताओं ने चेतावनी दी कि लेबर कोड कानून के खिलाफ मजदूरों का बढ़ता हुआ गुस्सा मोदी सरकार की कब्र खोद देगा। उन्होंने साफ किया कि मजदूर वर्ग मजदूरी की लूट और अधिकारों में कटौती को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। मजदूरों को गुलामी की ओर ले जाने वाले इस कॉर्पोरेटपरस्त लेबर कोड कानून को हर हाल में वापस लेना ही होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। सभा को उपरोक्त नेताओं के अलावा ऐक्टू की ओर से महेश प्रसाद यादव, एटक की ओर से मनोहर शर्मा और सीटू की ओर से मनोहर मंडल सहित कई अन्य लोगों ने भी संबोधित किया। मार्च में बड़ी संख्या में विभिन्न मजदूर संगठनों के सदस्य और आम मजदूर शामिल थे, जिन्होंने अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/






