
भागलपुर
भागलपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है जो सुशासन के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के गहरे अंतर को उजागर करती है। एक तरफ सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर नल-जल योजना है, तो दूसरी तरफ एक ऑपरेटर की मनमानी, जिसने पूरे गांव को पिछले 6 महीनों से पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला जिले के बेलडीहा गांव के वार्ड संख्या 11 का है। यहां मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत हर घर तक साफ पानी पहुंचाने के लिए नल-जल योजना लागू की गई थी। शुरुआत में सब कुछ ठीक चला, लेकिन पिछले छह महीनों से यहां नलों से पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि योजना के संचालन के लिए नियुक्त ऑपरेटर की मनमानी और लापरवाही का नतीजा है।
ऑपरेटर की मनमानी के कारण पूरी योजना ठप पड़ गई है और लाखों की लागत से बनी पानी की टंकी और पाइपलाइन महज शोपीस बनकर रह गए हैं। इस वजह से स्थानीय निवासियों में भारी रोष व्याप्त है।
पानी के लिए दर-दर भटक रहे ग्रामीण
पिछले छह महीनों से नल से पानी की सप्लाई बंद होने के कारण ग्रामीणों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। लोगों को पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है। इस स्थिति ने स्थानीय निवासियों के लिए गंभीर समस्याएं खड़ी कर दी हैं:
- लोगों को पीने और दैनिक जरूरतों के लिए पानी लाने के लिए दूर-दराज के चापाकलों या अन्य जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
- सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है, जिन्हें हर रोज पानी ढोकर लाना पड़ता है।
- जिस योजना का उद्देश्य लोगों को घर पर ही शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था, वह अब उनके लिए एक बड़ी मुसीबत का सबब बन गई है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि छह महीने से योजना बंद होने के बावजूद संबंधित विभाग या अधिकारियों ने अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। ऑपरेटर की मनमानी के आगे पूरा सिस्टम बेबस नजर आ रहा है। ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय स्तर पर शिकायत की, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा और ग्रामीणों को इस समस्या से निजात दिलाएगा?







