

Naugachia Land Dispute: रिश्तों की डोर जब कमजोर पड़ती है तो जमीन के टुकड़े अक्सर नासूर बन जाते हैं। ऐसा ही एक मामला भागलपुर के नवगछिया से सामने आया है, जहां एक महिला ने अपनी ही ननद पर पुश्तैनी जमीन अवैध रूप से बेचने का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले में महिला ने अंचलाधिकारी समेत कुल छह लोगों के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
क्या है पूरा Naugachia Land Dispute मामला?
मामला नवगछिया अनुमंडल के सिंधिया मकंदपुर गांव का है। यहां की निवासी ममता सिंह ने नवगछिया न्यायालय में एक नालसीवाद (शिकायत पत्र) दायर किया है। अपनी शिकायत में उन्होंने बताया कि धरहरा मौजा में स्थित उनकी पुश्तैनी जमीन का अभी तक कोई पारिवारिक बंटवारा नहीं हुआ है। इसके बावजूद उनकी ननद रिंकी कुमारी ने जमीन का एक बड़ा हिस्सा दो अन्य लोगों को बेच दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। महिला ने इसे जमीन का फर्जीवाड़ा बताते हुए कहा कि इस सौदेबाजी में बड़े स्तर पर अनियमितता बरती गई है।
शिकायत के अनुसार, जमीन से जुड़े विवरण इस प्रकार हैं:
- मौजा: धरहरा
- खाता संख्या: 1210
- खेसरा संख्या: 529, 539, और 526
- कुल रकबा: लगभग 4 एकड़ 29 डिसमिल
पीड़िता का आरोप है कि उनकी ननद रिंकी कुमारी ने यह जमीन विकास कुमार भारती और शुभम कुमार नामक व्यक्तियों को अवैध तरीके से बेच दी, जबकि इस पर उनका भी हक़ बनता है।
अधिकारी पर मिलीभगत और एकतरफा कार्रवाई का आरोप
ममता सिंह ने अपनी शिकायत में गोपालपुर के अंचलाधिकारी (CO) रौशन कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब जमीन की अवैध बिक्री के बाद दाखिल-खारिज (Mutation) की प्रक्रिया चल रही थी, तो उन्होंने अंचल कार्यालय में लिखित रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बावजूद, उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए अंचलाधिकारी ने एकतरफा आदेश पारित कर दिया और जमीन का दाखिल-खारिज खरीदारों के नाम पर कर दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
पीड़िता के अनुसार, जब स्थानीय थाने में उनकी सुनवाई नहीं हुई, तो उन्हें मजबूरन न्याय के लिए न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। उन्होंने अंचलाधिकारी रौशन कुमार, अपनी ननद रिंकी कुमारी, खरीदार विकास कुमार भारती और शुभम कुमार समेत कुल छह लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया है। फिलहाल, न्यायालय ने मामला दर्ज कर लिया है और अब यह विचाराधीन है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस मामले के सामने आने के बाद अनुमंडल में जमीन विवादों से जुड़े प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।



