



Pirpainti Power Plant: प्रशासन की सख्ती और रैयतों की मजबूरी के बीच पीरपैंती का पावर प्लांट प्रोजेक्ट पिस रहा है, लेकिन अब जिलाधिकारी ने साफ कर दिया है कि मुआवजे का मरहम भी लगेगा और कानून का डंडा भी चलेगा। भागलपुर के पीरपैंती में बनने वाले पावर प्लांट की अधिगृहित जमीन के मुआवजे को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।
Pirpainti Power Plant: भागलपुर के पीरपैंती प्रखंड कार्यालय में जिलाधिकारी (DM) डॉक्टर नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव भी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य उन रैयतों की समस्याओं का समाधान करना था, जिनकी मुआवजा राशि लंबित है या जो लोग अभी भी अधिगृहित जमीन पर खेती कर रहे हैं। बैठक के बाद डीएम ने स्पष्ट किया कि प्रशासन हर हाल में रैयतों का भुगतान करने को तैयार है, लेकिन कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार नहीं किया जा सकता।
Pirpainti Power Plant की जमीन पर क्यों हो रही खेती?
बैठक में यह बात सामने आई कि कुछ लोग मुआवजा मिलने के बावजूद अधिगृहित सरकारी भूमि पर दोबारा फसल लगा रहे हैं। इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा, “जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना 2013 में जारी हुई और मुआवजा 2015 में दिया जा चुका है। इसके बाद भी आप उस जमीन पर फसल उगा रहे हैं, जो कानूनी रूप से आपकी नहीं है।” उन्होंने याद दिलाया कि सितंबर 2025 में ही प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा प्लांट का शिलान्यास किया जा चुका है। डीएम ने सवाल किया कि जब अक्टूबर-नवंबर में फसल कट चुकी थी, तो दोबारा किसकी अनुमति से सरकारी जमीन पर फसल लगाई गई? आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि कुछ लोग आपसी विवादों के कारण मुआवजा नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने कहा, “जिनके नाम से पंचाट बना है, उनके उत्तराधिकारियों के बीच विवाद चल रहा है और मामला सिविल कोर्ट में है। यदि वे आपसी सहमति से विवाद सुलझाकर आवेदन देते हैं, तो प्रशासन उनका मामला वापस लेकर तुरंत भुगतान कर देगा।” उनकी राशि जिला भू-अर्जन कार्यालय में सुरक्षित पड़ी है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
मुआवजे की राह में कानूनी अड़चनें
एक और बड़ा पेंच उन मामलों में फंसा है, जहां पंचाट धारक की मृत्यु हो चुकी है और उनके आश्रितों को मिलने वाली मुआवजा राशि 50 लाख रुपये से अधिक है। वर्तमान नियमों के अनुसार, इतनी बड़ी राशि के भुगतान के लिए सिविल कोर्ट से उत्तराधिकार प्रमाण पत्र लाना अनिवार्य है।
डीएम ने बताया कि इस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए विभाग से पत्राचार किया गया है ताकि 50 लाख की सीमा को बढ़ाया जा सके और भू-अर्जन कार्यालय से ही सीधे भुगतान संभव हो सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जब तक यह नियम नहीं बदलता, तब तक आश्रितों को सिविल कोर्ट के आदेश का इंतजार करना होगा। इस पूरे प्रकरण में प्रशासन उन लोगों पर भी नजर रख रहा है जो भोले-भाले किसानों को दिग्भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। जिलाधिकारी ने ऐसे तत्वों को सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस महत्वपूर्ण बैठक में कहलगांव के अनुमंडल पदाधिकारी कृष्ण चंद्रगुप्त भी उपस्थित रहे।


