



भागलपुर जिले के सन्हौला प्रखंड अंतर्गत पोठिया में स्थित सरकारी विद्यालय में शिक्षक और शिक्षिका के बीच प्रधानाचार्य पद को लेकर शुरू हुआ विवाद अब थाने तक पहुँच गया है। यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
पोठिया स्कूल विवाद: प्रधानाचार्य पद पर घमासान, थाने पहुंचा मामला
प्रधानाचार्य पद को लेकर शुरू हुआ यह विवाद इतना गहरा गया कि यह स्कूल परिसर से निकलकर सीधा थाना पहुँच गया। मिली जानकारी के अनुसार, हाई स्कूल (10+2) के प्रधानाध्यापक मनोज कुमार और मिडिल स्कूल की प्रधानाध्यापिका गरिमा गुप्ता के बीच प्रधानाचार्य पद को लेकर तीखी नोकझोंक हुई।

प्रधानाध्यापक मनोज कुमार का आरोप है कि विद्यालय कार्यालय में मिडिल स्कूल की प्रधानाध्यापिका गरिमा गुप्ता ने ताला लगा दिया, जिसके कारण शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति तो दर्ज हो गई, लेकिन रजिस्टर में हाजिरी नहीं बन पाई। वहीं, गरिमा गुप्ता ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा है कि उन्होंने कोई ताला नहीं लगाया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

विवाद इतना बढ़ गया कि विद्यालय परिसर का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया। स्थिति बिगड़ने पर स्थानीय थाना को हस्तक्षेप करना पड़ा। दोनों पक्षों को थाने लाया गया, जहाँ आवेदन देने और आपसी माफीनामा के बाद फिलहाल मामला शांत हो गया है। इस बीच, गरिमा गुप्ता ने एक गंभीर आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा कि धोरैया प्रखंड (जिला बांका) अंतर्गत बटासर पंचायत के बाजार गांव निवासी शिक्षक संजीव कुमार वर्मा ने उनके साथ न सिर्फ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि दुर्व्यवहार भी किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित शिक्षक निजी विद्यालय संचालित करते हैं और सरकारी विद्यालय में केवल उपस्थिति दर्ज कराकर अपने निजी संस्थान चले जाया करते हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
वहीं, वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए प्रधानाध्यापक मनोज कुमार ने दावा किया है कि उनके कार्यभार संभालने से पहले विद्यालय खाते से लगभग ₹50,000 की निकासी की गई थी। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
शिक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल
प्रखंड विकास पदाधिकारी कन्हैया कुमार ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वे मामले को देख रहे हैं। लेकिन, कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। क्या विवाद की सूचना समय पर शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों को दी गई? यदि सभी शिक्षक थाने गए थे, तो विद्यालय में बच्चों की जिम्मेदारी किसके पास थी? किसी अप्रिय घटना की स्थिति में जवाबदेही किसकी तय होगी? क्या बिना अनुमति विद्यालय छोड़ने पर विभागीय कार्रवाई होगी? क्या वित्तीय लेन-देन की जांच भी कराई जाएगी? इन सवालों पर ग्रामीणों की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विद्यालय में पढ़ाई कम और राजनीति ज्यादा होती है। शिक्षकों के आपसी विवाद का सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है और शिक्षा का माहौल प्रभावित हो रहा है।
शिक्षा व्यवस्था पर इस तरह के माहौल का व्यापक असर पड़ेगा। विद्यालय को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है। ऐसे में शिक्षक-शिक्षिका के बीच सार्वजनिक विवाद और आरोप-प्रत्यारोप से छात्रों का मनोबल प्रभावित होना स्वाभाविक है। पोठिया मध्य विद्यालय पहले भी विवादों में रहा है, जिससे अभिभावकों में चिंता बनी हुई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कर ठोस कार्रवाई करते हैं या मामला यूं ही ठंडे बस्ते में चला जाता है। फिलहाल स्थानीय लोगों और अभिभावकों की निगाहें प्रशासनिक निर्णय पर टिकी हुई हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें






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