

Bhagalpur News: कुदरत जब करवट लेती है तो इंसान की सारी हेकड़ी धरी की धरी रह जाती है, लेकिन सही तैयारी और जानकारी हो तो बड़ी से बड़ी आपदा के सामने भी सीना तानकर खड़ा रहा जा सकता है। इसी मूलमंत्र के साथ भागलपुर में आपदा से लड़ने की सबसे बड़ी तैयारी शुरू की गई है।
Bhagalpur News: जब कांप उठे धरती तो कैसे बचाएं अपनी जान? सुंदरवती कॉलेज में SDRF ने सिखाए जिंदगी बचाने के गुर
Bhagalpur News: आपदा सुरक्षा पखवाड़े में छात्राओं को मिला प्रशिक्षण
बिहार सरकार और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में 15 जनवरी से 28 जनवरी तक चलाए जा रहे विशेष ‘सुरक्षा पखवाड़ा’ अभियान के तहत भागलपुर के प्रतिष्ठित सुंदरवती महिला कॉलेज में राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीम ने एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भूकंप जैसी विनाशकारी प्राकृतिक आपदा के समय बचाव के तरीकों से छात्राओं को अवगत कराना था। कॉलेज परिसर में आयोजित इस कार्यशाला में 200 से अधिक छात्राओं, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों ने हिस्सा लिया और भूकंप से बचाव के गुर सीखे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह प्रशिक्षण भविष्य में किसी भी अनहोनी की स्थिति में जान-माल के नुकसान को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा।
ड्रॉप, कवर और होल्ड: भूकंप का रामबाण
प्रशिक्षण का नेतृत्व कर रहे एसडीआरएफ के इंस्पेक्टर कुमार नीरू ने उपस्थित सभी लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भूकंप आने पर घबराहट सबसे बड़ी दुश्मन साबित होती है। उन्होंने बताया कि आपदा के वक्त शांत दिमाग से काम लेना चाहिए।
उन्होंने ‘ड्रॉप, कवर और होल्ड’ की जीवन रक्षक तकनीक का प्रदर्शन करते हुए समझाया। इंस्पेक्टर नीरू ने कहा, “जैसे ही भूकंप के झटके महसूस हों, तुरंत किसी मजबूत टेबल, डेस्क या बेड के नीचे छिप जाएं (ड्रॉप), अपने सिर और गर्दन को हाथों से ढकें (कवर) और जब तक झटके रुक न जाएं, मजबूती से किसी चीज़ को पकड़े रहें (होल्ड)।” इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि भूकंप के बाद क्या सावधानियां बरतनी चाहिए, जैसे बिजली के उपकरण और गैस सिलेंडर की जांच करना, घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार देना और बिना देरी किए प्रशासन को सूचित करना।
जागरूकता ही है सबसे बड़ा हथियार
एसडीआरएफ इंस्पेक्टर ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आपदा प्रबंधन की रीढ़ हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने कहा कि जब आम नागरिक प्रशिक्षित होता है, तो वह न केवल अपनी जान बचा सकता है, बल्कि अपने आस-पास के लोगों की भी मदद कर सकता है। सही जानकारी और त्वरित प्रतिक्रिया से आपदा के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस पहल का उद्देश्य हर नागरिक को एक ‘प्रथम प्रत्युत्तरदाता’ बनाना है, जो किसी भी संकट की घड़ी में चट्टान की तरह खड़ा रह सके। कॉलेज की छात्राओं ने भी इस प्रशिक्षण पर खुशी जाहिर करते हुए इसे बेहद उपयोगी बताया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस तरह के आयोजनों से समाज में आपदा के प्रति एक गंभीर और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है, जो एक सुरक्षित भविष्य के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

