



Swami Dayanand Saraswati: जब समाज कुरीतियों के अंधकार में डूबा था, तब एक दार्शनिक ने ज्ञान की मशाल जलाकर ‘वेदों की ओर लौटो’ का नारा बुलंद किया। इसी कड़ी में कहलगांव स्थित महिला प्रशिक्षण केंद्र में उनकी जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाई गई, जहां महिलाओं के बौद्धिक विकास पर जोर दिया गया।
Swami Dayanand Saraswati: कहलगांव के महिला प्रशिक्षण केंद्र में महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती के मौके पर महिलाओं के बौद्धिक विकास और सम्मान हेतु एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। समाजसेवी बंटी पांडे और छोटू पांडे ने इस कार्यक्रम का नेतृत्व किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने केंद्र की प्रशिक्षु और प्रशिक्षक महिलाओं को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया और सभी ने मिलकर केक काटा।
Swami Dayanand Saraswati: कुरीतियों के विरुद्ध एक मशाल
इस अवसर पर समाजसेवी बंटी पांडे ने कहा कि स्वामी जी ने बाल विवाह और सती प्रथा जैसी कुरीतियों का डटकर विरोध किया और समाज को एक नई दिशा प्रदान की। उन्होंने समाज को इन बुराइयों के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया। उनका ‘वेदों की ओर लौटो’ का संदेश आज भी प्रासंगिक है।
कन्हैया खंडेलवाल ने कहा कि वह एक महान समाज सुधारक थे, जिन्होंने भारतीय समाज में व्याप्त रूढ़िवादी कुरीतियों को दूर करने के लिए शिक्षा को एक महत्वपूर्ण साधन बनाया। उन्होंने अपने ज्ञान से समाज को नई चेतना दी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
शिक्षा और महिला सम्मान पर जोर
इस जयंती समारोह ने न केवल स्वामी जी को श्रद्धांजलि दी, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस मौके पर रेखा देवी, बबिता देवी, रागिनी कुमारी सहित अन्य प्रशिक्षु व प्रशिक्षक महिलाएं उपस्थित थीं, जिन्होंने स्वामी जी के दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।




