back to top
⮜ शहर चुनें
फ़रवरी, 11, 2026
spot_img

Tilka Manjhi Jayanti: भागलपुर में गूंजा ‘जबरा पहाड़िया’ का जयघोष, पारंपरिक नृत्य से दी गई अमर शहीद को श्रद्धांजलि

spot_img
- Advertisement - Advertisement

Tilka Manjhi: जैसे कोई चिंगारी पूरे जंगल को आग लगा दे, वैसे ही एक वीर ने अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला दी थीं। उसी अमर शहीद की 276वीं जयंती पर आज भागलपुर की धरती उन्हें नमन कर रही है।

भागलपुर के ऐतिहासिक तिलकामांझी चौक पर शुक्रवार को आदिवासी समुदाय द्वारा भारत के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी शहीद तिलकामांझी की 276वीं जयंती बड़े ही श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस कार्यक्रम में आदिवासी समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर अपने वीर पूर्वज को याद किया और उनके दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।

- Advertisement -

जबरा पहाड़िया Tilka Manjhi को किया गया नमन

कार्यक्रम में भागलपुर नगर निगम के उप महापौर सलाउद्दीन हसन, जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता कमल जायसवाल और ईशान सिन्हा समेत कई गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं। आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने सभी अतिथियों का स्वागत पारंपरिक तरीके से फूलों का गुलदस्ता भेंट कर किया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि शहीद Tilka Manjhi का बलिदान आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने उस दौर में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बिगुल फूंका, जब कोई सोच भी नहीं सकता था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

- Advertisement -

वक्ताओं ने युवाओं से अपील की कि वे इस महान स्वतंत्रता सेनानी के आदर्शों को अपने जीवन में उतारें और देश व समाज की उन्नति में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि तिलकामांझी का संघर्ष केवल अंग्रेजों के खिलाफ नहीं, बल्कि शोषण और अन्याय के खिलाफ था।

- Advertisement -
यह भी पढ़ें:  Bhagalpur News: शाहनवाज़ हुसैन का Rahul Gandhi पर सबसे बड़ा हमला, बोले- 'संसद में अर्बन नक्सल जैसा व्यवहार', बिहार में सियासी भूचाल!

पारंपरिक संथाली नृत्य ने बांधा समां

जयंती समारोह का मुख्य आकर्षण आदिवासी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया गया पारंपरिक संथाली नृत्य रहा। ढोल-नगाड़ों की गूंज और मांदर की थाप पर कलाकारों के थिरकते कदमों ने पूरे माहौल में एक नया जोश भर दिया। वहां मौजूद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का हौसला बढ़ाया। यह प्रस्तुति न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम थी, बल्कि उस गौरवशाली विरासत का प्रतीक भी थी, जिसकी रक्षा के लिए तिलकामांझी ने अपना जीवन बलिदान कर दिया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि शहीदों की विरासत कभी नहीं मरती। तिलकामांझी जैसे वीर सपूतों की गाथाएं आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेंगी। कार्यक्रम का समापन शहीद तिलकामांझी की प्रतिमा पर माल्यार्पण और उनके जयकारों के साथ हुआ। यह एक अविस्मरणीय क्षण था जब सभी ने मिलकर उस महान स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि दी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

Deen Dayal Upadhyay की पुण्यतिथि पर जमुई में गूंजे ‘अंत्योदय’ के विचार, पुराने सिपाही हुए सम्मानित

Deen Dayal Upadhyay: सियासत की वैचारिक जमीन पर जब भी दार्शनिकों के नाम गूंजते...

Bokaro News: नगर पालिका चुनाव 2026 की रणभेरी, प्रेक्षकों ने मतदान केंद्रों का लिया जायजा, दिए कड़े निर्देश

Bokaro News: लोकतंत्र के महापर्व का मंच सजने से पहले ही प्रशासनिक अमला अपनी...

महिंद्रा स्कॉर्पियो एन: एसयूवी सेगमेंट में जलवा बरकरार, ग्राहकों की पहली पसंद

भारतीय एसयूवी बाजार में इन दिनों जबरदस्त गर्माहट देखने को मिल रही है, और...
error: कॉपी नहीं, शेयर करें