
Bhagalpur News: बुढ़ापे की लाठी जब हक़ की लड़ाई में तब्दील हो जाए तो समझ लीजिए की व्यवस्था में कहीं बड़ी चूक है। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) में भी कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला, जहाँ सैकड़ों पेंशनभोगी अपने ही हक़ के पैसे के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं। अपनी लंबित मांगों को लेकर पेंशनर संघर्ष मंच के बैनर तले बड़ी संख्या में पेंशनरों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और कुलपति को एक ज्ञापन सौंपा।
पेंशनर संघर्ष मंच के सदस्यों ने बताया कि लगभग 2669 पेंशनभोगी अपनी पेंशन से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कई महीनों से वे अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिला है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। बार-बार के अनुरोध और आवेदनों के बावजूद, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे पेंशनभोगियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के ये पेंशनभोगी लंबे समय से अपनी पेंशन और अन्य देय राशि के भुगतान में हो रही देरी से परेशान हैं। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है, जिसके कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अपनी मांगों को लेकर उन्होंने कई बार प्रशासन को अवगत कराया, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
इसी क्रम में, पेंशनर संघर्ष मंच के नेतृत्व में सभी ने एकजुट होकर कुलपति के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें उनकी सभी समस्याओं का उल्लेख किया गया है। पेंशनभोगियों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक सांकेतिक प्रदर्शन है और अगर उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो वे एक बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
चेतावनी के बाद क्या जागेगा प्रशासन?
पेंशनरों ने अपने ज्ञापन में साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी मांगों पर तत्काल ध्यान नहीं दिया, तो वे अनिश्चितकालीन धरना और प्रदर्शन जैसे बड़े कदम उठा सकते हैं। सदस्यों ने कहा कि वे अपने हक़ की लड़ाई लड़ रहे हैं और जब तक उनकी सभी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो जाता, वे पीछे नहीं हटेंगे। अब देखना यह होगा कि इस चेतावनी के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन क्या कदम उठाता है और इन वरिष्ठ नागरिकों को कब तक न्याय मिल पाता है।






