Vikramshila Setu: भागलपुर और नवगछिया के बीच जीवनरेखा माना जाने वाला विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने के बाद से ही पूरे सीमांचल में हड़कंप मचा हुआ है। सड़क संपर्क टूटने से आम जनजीवन और व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए अब जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है।
विक्रमशिला सेतु यातायात: स्लैब टूटने से भागलपुर-कोसी का संपर्क ठप, हजारों लोग नाव से कर रहे गंगा पार
विक्रमशिला सेतु यातायात: भागलपुर और कोसी-सीमांचल को जोड़ने वाले विक्रमशिला सेतु पर स्लैब टूटने से हाहाकार मच गया है। 3 मई की आधी रात से इस महत्वपूर्ण सेतु पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप है, जिससे हजारों यात्री और कारोबारी मुश्किल में फंस गए हैं।
विक्रमशिला सेतु पर आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया है। इस घटना ने भागलपुर के साथ-साथ कोसी, सीमांचल, नेपाल और नॉर्थ-ईस्ट के बीच सड़क संपर्क को बुरी तरह प्रभावित किया है। ट्रकों और अन्य भारी वाहनों की आवाजाही ठप होने से व्यापार और दैनिक जीवन पर गहरा असर पड़ा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
Vikramshila Setu क्षति: कनेक्टिविटी पर गहरा असर
विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने से भागलपुर से नवगछिया समेत पूरे सीमांचल क्षेत्र का सड़क संपर्क गंभीर रूप से बाधित हो गया है। पुल पर आवागमन पूरी तरह बंद होने के कारण न केवल आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, बल्कि व्यापारिक गतिविधियाँ भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। लोग मजबूरन नावों और छोटे जहाजों के सहारे गंगा नदी पार कर रहे हैं, जबकि चारपहिया वाहनों और आवश्यक सामानों की आवाजाही लगभग ठप पड़ गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
कोलकाता से पहुंचे मालवाहक जहाज: कैसे मिलेगी राहत?
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित पहल की है। भागलपुर के जिलाधिकारी के अथक प्रयासों से कोलकाता से चार बड़े मालवाहक जहाज मंगाए गए हैं। इन जहाजों का संचालन तिनटंगा करारी घाट और कहलगांव घाट के बीच किया जाएगा। प्रत्येक जहाज एक बार में 10 से 24 वाहनों को ले जाने में सक्षम है, जिससे आवश्यक वस्तुओं और वाहनों के परिवहन में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। यह कदम इस संकट की घड़ी में कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
आवागमन ठप, ठहरी जिंदगी की रफ्तार
विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। पहले जहां वाहन घंटों में अपनी मंजिल तक पहुँचते थे, वहीं अब वैकल्पिक रास्तों या साधनों की तलाश में लंबा समय लग रहा है। इस अचानक आई बाधा ने यात्रियों को भारी परेशानी में डाल दिया है। खासकर, उन लोगों के लिए जो दैनिक आवागमन के लिए इस सेतु पर निर्भर थे, उनके लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर भी इसका असर दिखना शुरू हो गया है।
गंगा पार करने का एकमात्र जरिया नाव
सेतु बंद होने के बाद, भागलपुर के बरारी पुलघाट और नवगछिया के जाह्नवी चौक घाट के बीच नावों और जहाजों की आवाजाही ही गंगा पार करने का एकमात्र विकल्प बचा है। शुक्रवार को दोपहर तक हजारों लोगों ने गंगा पार करने के लिए नावों का सहारा लिया। यह अस्थाई व्यवस्था लोगों की मजबूरी बन गई है। नाव घाटों पर यात्रियों की भारी भीड़ देखी जा रही है। लोग घंटों इंतजार कर अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
घाटों पर जाम की समस्या, विक्रमशिला सेतु यातायात का विकल्प बना नाव
बरारी पुलघाट के किनारे तक पहुंचने में लोगों को भारी जाम का सामना करना पड़ रहा है। पुल घाट के संकरे मुहाने पर ई-रिक्शा और ऑटो का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे पैदल यात्रियों के लिए भी निकलना मुश्किल हो गया है। यह स्थिति विक्रमशिला सेतु यातायात के विकल्प के रूप में इस्तेमाल हो रहे नाव घाटों पर भी चुनौतियां पैदा कर रही है।
घाटों का निरीक्षण और आगे की तैयारी
मालवाहक सेवा शुरू करने की तैयारियों के तहत कोलकाता की शार्क शिपिंग कंपनी के निदेशक मोहम्मद अरशद और तनवीर हसन ने स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर गंगा तट का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान अंचल नाजीर ललन कुमार सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। टीम ने घाटों की वर्तमान स्थिति, गंगा के जलस्तर और जहाजों के सुरक्षित व सुचारु संचालन की व्यवहार्यता का बारीकी से जायजा लिया। इस निरीक्षण के बाद जल्द ही मालवाहक जहाज सेवा शुरू होने की संभावना है, जिससे लाखों लोगों को राहत मिलेगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







