भागलपुर समाचार: बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर बन रहे बहुप्रतीक्षित विक्रमशिला सेतु के समानांतर फोरलेन पुल के निर्माण को लेकर एक नई अड़चन सामने आ गई है। जिस रफ्तार से इस परियोजना का काम आगे बढ़ रहा था, अब उस पर भूमि अधिग्रहण की तलवार लटक गई है। क्या यह बाधा करोड़ों की इस परियोजना को एक बार फिर अधर में लटका देगी?
विक्रमशिला सेतु के ठीक बगल में निर्मित हो रहे इस महत्वपूर्ण पुल का कार्य तेजी पर था, लेकिन इसके पहुंच पथ (अप्रोच रोड) के लिए आवश्यक भूमि अब कम पड़ रही है। यह समस्या परियोजना की गति को धीमा कर सकती है और इसके निर्धारित समय पर पूरा होने पर सवाल खड़े कर सकती है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
भूमि अधिग्रहण बनी बड़ी चुनौती
जानकारी के अनुसार, विक्रमशिला सेतु के समानांतर बन रहे इस फोरलेन पुल के अप्रोच रोड के लिए और अधिक जमीन की आवश्यकता है। पहले से अधिग्रहित की गई भूमि पर्याप्त नहीं है, जिसके कारण निर्माण कार्य के एक महत्वपूर्ण हिस्से पर असर पड़ रहा है। इस कमी को दूर करने के लिए अब नए सिरे से भूमि की पहचान और उसके अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करनी होगी, जिसमें समय और संसाधनों दोनों की खपत होगी।
इस गंभीर स्थिति पर संज्ञान लेते हुए, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने भागलपुर के भूमि अधिग्रहण पदाधिकारी (LAO) को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखा है। इस पत्र में मंत्रालय ने अप्रोच रोड के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता पर जोर दिया है और इस दिशा में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार भी इस परियोजना की प्रगति को लेकर चिंतित है।
मंत्रालय का हस्तक्षेप और आगे की राह
मंत्रालय के पत्र के बाद अब स्थानीय प्रशासन और भूमि अधिग्रहण विभाग पर दबाव बढ़ गया है। उन्हें जल्द से जल्द अतिरिक्त भूमि की पहचान कर उसके अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरा करना होगा। यदि इसमें देर होती है, तो विक्रमशिला सेतु के समानांतर फोरलेन पुल का उद्घाटन और उस पर आवागमन शुरू होने की तारीखें प्रभावित हो सकती हैं। यह पुल भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए यातायात की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गौरतलब है कि विक्रमशिला सेतु वर्तमान में यातायात के भारी दबाव से जूझ रहा है। इसके समानांतर बन रहा यह नया फोरलेन पुल न केवल यातायात को सुगम बनाएगा बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति देगा। ऐसे में, इस परियोजना में किसी भी तरह की देरी जनता के लिए निराशाजनक हो सकती है। सभी की निगाहें अब भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर टिकी हैं कि यह कितनी तेजी से पूरी होती है।








