
भागलपुर समाचार:
लाखों की भीड़ जुटेगी, भव्य मेले की तैयारी के दावे भी होंगे, लेकिन जब कंठ तर करने को पानी ही न हो तो क्या होगा? सुल्तानगंज के विश्व प्रसिद्ध अजगैवीनाथ धाम में कुछ ऐसी ही स्थिति है, जहां श्रावणी मेले से ठीक पहले जल संकट ने प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी है।
महीनों से खराब पड़ी बोरिंग, बेपरवाह विभाग
बिहार के भागलपुर जिले में स्थित सुल्तानगंज का अजगैवीनाथ मंदिर, जहां से विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की शुरुआत होती है, इन दिनों गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहा है। मंदिर परिसर में भक्तों और पुजारियों की सुविधा के लिए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) द्वारा स्थापित की गई बोरिंग पिछले कई महीनों से बंद पड़ी है। इस बोरिंग के खराब होने से मंदिर में पानी की आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई है, जिससे वहां आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
श्रावणी मेले पर संकट के बादल
चिंता की बात यह है कि कुछ ही हफ्तों में श्रावणी मेला शुरू होने वाला है, जिसमें देश-विदेश से लाखों की संख्या में कांवड़िये यहां उत्तरवाहिनी गंगा का जल लेने पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर परिसर में पानी का न होना एक बड़ी प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। यह स्थिति मेले के दौरान एक बड़ी अव्यवस्था और अफरा-तफरी का कारण बन सकती है। स्थानीय लोगों और मंदिर प्रबंधन ने कई बार इस समस्या की ओर ध्यान दिलाया, लेकिन विभागीय अधिकारियों की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
बड़े सवाल और आने वाली चुनौतियां
मेले के दौरान लाखों भक्तों की प्यास बुझाने और मंदिर परिसर की साफ-सफाई के लिए पानी की जरूरत कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में पीएचईडी की यह लापरवाही कई गंभीर सवाल खड़े करती है। अगर समय रहते इस बोरिंग को ठीक नहीं किया गया, तो मेले के दौरान स्थिति अनियंत्रित हो सकती है।
- लाखों कांवड़ियों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था कैसे होगी?
- मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।
- गर्मी और उमस के मौसम में पानी की कमी से भक्तों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है।
- प्रशासन के बड़े-बड़े दावों के बीच यह छोटी लेकिन महत्वपूर्ण तैयारी का अभाव पूरी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और पीएचईडी इस गंभीर समस्या पर कब ध्यान देता है और श्रावणी मेला शुरू होने से पहले अजगैवीनाथ धाम के इस जल संकट को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।







