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29 नवम्बर, 2025

BIG UPDATE – बिहार में पराली जलाने पर लगा सख्त पहरा, तोड़ने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई, जानिए

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बिहार न्यूज़: क्या खेत में आग लगाना पड़ सकता है महंगा? अगर आप बिहार में किसान हैं और पराली जलाने की सोच रहे हैं, तो सावधान! सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जो न सिर्फ आपकी जेब पर भारी पड़ेगा, बल्कि जेल की हवा भी खिला सकता है।

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बिहार में धान की कटाई के बाद खेतों में पराली जलाने की प्रथा पर राज्य सरकार ने अब पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला पर्यावरण संरक्षण और वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के उद्देश्य से लिया गया है। कृषि विभाग ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत नियम तोड़ने वाले किसानों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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क्या है नया नियम?

राज्य के सभी जिलों में अब पराली जलाना गैरकानूनी होगा। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यह प्रतिबंध केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी सख्ती से लागू किया जाएगा। कृषि अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन को इस पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

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पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण बनता है, जिससे सांस संबंधी बीमारियां और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होती हैं। इसके अलावा, खेत में पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता कम होती है, क्योंकि इससे मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव और पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। सरकार का मानना है कि इस प्रतिबंध से न केवल प्रदूषण पर नियंत्रण होगा, बल्कि मिट्टी का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।

नियम तोड़ने पर क्या होगा?

नियमों का उल्लंघन करने वाले किसानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसमें आर्थिक दंड के साथ-साथ कानूनी मुकदमे भी शामिल हो सकते हैं। कृषि विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार, पराली जलाने वाले किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से भी वंचित किया जा सकता है। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि किसान इस प्रतिबंध को गंभीरता से लें।

सरकार का मकसद और विकल्प

सरकार का उद्देश्य किसानों को पराली जलाने के बजाय उसके उचित निपटान और वैकल्पिक उपयोग के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके लिए किसानों को पराली प्रबंधन की नई तकनीकों और मशीनों के बारे में जानकारी दी जा रही है। पराली का उपयोग खाद बनाने, पशु चारा के रूप में और बायोमास ऊर्जा उत्पादन में किया जा सकता है, जो किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत भी बन सकता है। राज्य सरकार इन विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं भी चला रही है।

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