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29 नवम्बर, 2025

बिहार में भूमि विवादों का नया ‘डिजिटल मंत्र’: अब वकील नहीं, सिर्फ क्लिक करेगा काम!

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पटना। बिहार के राजस्व न्यायालयों में अब जमीन से जुड़े मामलों को निपटाने का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है। दशकों पुरानी जटिल प्रक्रिया और वकीलों की लंबी कतारों को अलविदा कहने का वक्त आ गया है। एक नई व्यवस्था शुरू हुई है, जो न सिर्फ आपकी जेब हल्की करेगी, बल्कि न्याय भी आपके द्वार तक ले आएगी।

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बिहार सरकार ने भूमि विवादों के त्वरित और पारदर्शी समाधान के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। राज्य के सभी राजस्व न्यायालयों को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद, अब जमीन संबंधी मुकदमों की पैरवी के लिए वकीलों की आवश्यकता नहीं होगी। यह कदम आम जनता को सीधे न्याय तक पहुंच प्रदान करने और प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।

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नई व्यवस्था की मुख्य बातें

इस डिजिटल पहल का मुख्य उद्देश्य भूमि विवादों के निपटारे में लगने वाले समय को कम करना और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना है। ऑनलाइन प्रणाली के तहत, वादकारी अपनी शिकायतें, आवेदन और संबंधित दस्तावेज सीधे वेब पोर्टल के माध्यम से जमा कर सकेंगे। इसके साथ ही, सुनवाई की प्रक्रिया भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ही आयोजित की जाएगी, जिससे पक्षकारों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी।

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सरकार का मानना है कि यह प्रणाली न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगी, बल्कि लोगों को बिचौलियों और अनावश्यक खर्चों से भी बचाएगी। अब तक भूमि संबंधी मामलों में वकीलों की फीस और अन्य खर्चे एक बड़ी चुनौती होते थे, लेकिन नई व्यवस्था इसे खत्म करने का प्रयास करेगी।

ऑनलाइन प्रक्रिया कैसे काम करेगी?

नागरिकों को राजस्व न्यायालयों की ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग करने के लिए एक विशेष पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा। इस पोर्टल पर वे अपनी पहचान सत्यापित करने के बाद, अपनी शिकायत दर्ज कर सकेंगे। शिकायत के साथ-साथ, उन्हें अपनी जमीन से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज, जैसे खतियान, लगान रसीद, दाखिल-खारिज दस्तावेज आदि को स्कैन करके अपलोड करना होगा।

आवेदन जमा होने के बाद, संबंधित राजस्व अधिकारी द्वारा उनकी जांच की जाएगी। सुनवाई की तिथि और समय की सूचना पक्षकारों को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी पर भेजी जाएगी। सुनवाई वर्चुअल मोड में होगी, जिसमें पक्षकार अपने घर या किसी भी सुविधाजनक स्थान से भाग ले सकेंगे। फैसले और आदेश भी ऑनलाइन ही जारी किए जाएंगे।

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नागरिकों को क्या मिलेगा फायदा?

इस नई व्यवस्था से बिहार के लाखों भूमि मालिकों और किसानों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है:

  • समय की बचत: मुकदमों के त्वरित निपटारे से लोगों का कीमती समय बचेगा।
  • लागत में कमी: वकीलों की फीस और कोर्ट-कचहरी के अन्य खर्चों से मुक्ति मिलेगी।
  • पारदर्शिता: पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से इसमें पारदर्शिता बढ़ेगी और मनमानी पर रोक लगेगी।
  • भ्रष्टाचार पर नियंत्रण: बिचौलियों की भूमिका खत्म होने से भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होगी।
  • सुविधाजनक पहुंच: ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी आसानी से अपने मामलों को ऑनलाइन दर्ज और फॉलो कर सकेंगे।
  • दस्तावेजों का सुरक्षित प्रबंधन: सभी दस्तावेज डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेंगे।
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बिहार सरकार का यह कदम डिजिटल इंडिया और सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह न केवल भूमि विवादों के समाधान में तेजी लाएगा, बल्कि आम जनता को एक सरल, सुलभ और न्यायपूर्ण प्रणाली का अनुभव भी देगा। आने वाले समय में, यह देखना दिलचस्प होगा कि यह पहल जमीन से जुड़े विवादों को सुलझाने में कितनी प्रभावी साबित होती है और किस तरह से राज्य के राजस्व प्रशासन को और अधिक मजबूत करती है।

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