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फ़रवरी, 21, 2026
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मधुबनी के झंझारपुर में कमला बलान खतरे के निशान से 75 सेंटीमीटर ऊपर, उफनाईं गंडक-कोसी बागमती खतरे के निशान से पार

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बिहार मानसून की मेहरबानी से तीन दिन से पानी-पानी है। राज्य के 11 जिलों में शनिवार को जोरदार बारिश के आसार हैं। मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान में 5 जुलाई तक अलग-अलग जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है। प्रदेश की अधिकतर नदियां उफान पर हैं। कई का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है।

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उत्तर बिहार के अधिकांश हिस्से में 40 एमएम से अधिक और दक्षिण हिस्से में तीन से 30 एमएम तक बारिश हुई है। सुपौल के वसुआ में कोसी नदी और अररिया में परमान नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 118 सेंटी मीटर ऊपर है। गोपालगंज के डुमरिया घाट में गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर ऊपर है। किशनगंज में महानंदामधुबनी के झंझारपुर में कमला बलान खतरे के निशान से 75 सेंटीमीटर ऊपर, उफनाईं गंडक-कोसी बागमती खतरे के निशान से पार खतरे के निशान से 90 सेंटीमीटर ऊपर है। पूर्णिया में जलस्तर 87 सेंटीमीटर और कटिहार के झावा में 104 सेंटीमीटर ऊपर है। मुजफ्फरपुर के रुन्नी में बागमती नदी का जलस्तर 85 सेंटीमीटर और बेनीबाद में 70 सेंटीमीटर ऊपर है। मधुबनी के झंझारपुर में कमला बलान नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 75 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है।

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पूर्णिया के अमौर क्षेत्र में दो दिनों से लगातार बारिश हो रही है। जिले के कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है तो वही ग्रामीण क्षेत्र के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सड़कों पर दो फीट पानी चढ़ गया है। जिससे लोगों के आवागमन में दिक्कत हो रही है। लोग इन क्षेत्रों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित कर राहत दिए जाने और कम्युनिटी किचन शुरू कराने की अपील सरकार से कर रहे हैं।

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पूर्णिया के अमौर में कनकई नदी के बढ़ते
जलस्तर के साथ ही गांवों में पानी घुस चुका है। कई लोग अब भी घरों में फंसे हुए हैं। कई लोग गांव से बाहर पुल पर शरण ले रहे हैं। लोगों के सामने अब खाने पीने की आफत आ गयी है। यहां रहने वाले लोगों के चूल्हे पर भी खतरा मंडराने लगा है। 24 घंटे में इस गांव में एक भी चूल्हा नहीं जला है।

खासकर कनकई नदी के उफान से प्रभावित नागरा टोली, कटहलबारी, सिमलवारी टोला, बाभनडोभ, ज्ञानडोभ,बगबना, हरिपुर, खारीमहीन गांव,चनकी,मीर टोला, तेलंगा, लालचूरा, सनीटोला,बलुआटोली, हफनिया, तालबारी, चौका डहुआबाड़ी, तालबारी महादिलत टोला, सुरजापुर जैसे दर्जन गांव में सभी के घरों में पानी घुस जाने से लोगों में अफरा तफरी का माहौल बना हुआ है। कुछ लोग पैठान टोली पुल मे शरण लिए हुए है। लोगों के घरों में पानी घुस जाने के कारण विगत 24 घंटे से खाना नहीं बना है। जिससे लोगों को समस्या हो गई है।इधर प्रशासन की ओर से अबतक कोई व्यवस्था नहीं है।

जानकारी के अनुसार, अमौर प्रखंड विकास पदाधिकारी रघुनंदन आनंद, अंचालाधिकिरी सहदुल हक एवं कर्मचारी कीमधुबनी के झंझारपुर में कमला बलान खतरे के निशान से 75 सेंटीमीटर ऊपर, उफनाईं गंडक-कोसी बागमती खतरे के निशान से पार ओर से विभिन्न गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया, साथ ही जनप्रतिनिधियों के साथ प्रखंड सभागार मे नोडल पदाधिकारी श्वेतम दीक्षित, प्रखंड विकास पदाधिकारी रघुनंदन आनंद, अंचालाधिकिरी सहदुल हक, मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी प्रशान्त कुमार राय, समेकित बाल विकास परियोजना पदाधिकारी फिरदोस शेख, प्रखंड अमौर प्रमुख प्रतिनिधि अफसर नदवी, कर्मचारी, सभी मुखिया, सभी पंचायत समिति एवं लोगों के बीच आज संभावित बाढ आपदा को ले जानकारी ली गई साथ ही सभी मुखिया ने अपने क्षेत्र की समस्या को बताया और बाढ से संबंधित विभिन्न प्रकार के बिन्दुओ पर उल्लेख और चर्चा की, सभागार मे गणमान्य लोग मौजूद रहे।

बताया जा रहा है कि बाढ़ के कारण बीती रात से ही सिमलवारी नगरा टोली मे चार परिवार आज भी बीच पानी में फंसा है। ना एनडीआरफ टीम, और ना ही एसडीआरफ की टीम ही है। अमौर से ज्ञानडोभ जाने वाली सड़क के ऊपर तीन फिट पानी बह रहा है। वही गांव जाने वाली मुख्यमंत्री सड़क के ऊपर से पानी बहने के कारण प्रखंड मुख्यालय से सम्पर्क भंग हो गया।जिससे लोगो का घरों से निकलना मुश्किल हो गया। पीने के पानी मे भी संकट आ गया है, लोग बाढ का गंदा पीने के लिए मजबूर हो सकते हैं। लोगों की मांग है कि लोगों के लिए कम्युनिटी किचन चलाना बहुत जरुरी है। सभी जगह जलमग्न हो गया है। जिससे खाने खाने के लिए लोग मोहताज है।

मौसम विज्ञान विभाग ने बिहार के सभी जिलों में बारिश होने के साथ वज्रपात (आकाशीय बिजली) की आशंका जताई है। लोगों को बेवजह घर से बाहर न जाने की सलाह दी गई है। साथ ही पक्के मकानों में शरण लेने को कहा गया है। सरकारी आंकड़ों में वज्रपात से पिछले तीन दिन में 26 लोगों की मौत हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रत्येक परिवार को 4 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। गैरसरकारी आंकड़ों के मुताबिक 72 घंटे में वज्रपात से 37 लोगों की मौत हो चुकी है।

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