

Tiger Marathon: जंगल की शांत फिजाओं में गूंजेगी धावकों की हुंकार, जब पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का संदेश लेकर हजारों कदम आगे बढ़ेंगे। यह सिर्फ एक दौड़ नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति मानव की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और अभिनेता रणदीप हुड्डा ने अलवर में होने वाली इस अनूठी पहल के लिए बुधवार को मेडल और टी-शर्ट जारी किए।
टाइगर मैराथन का उद्देश्य: पर्यावरण और वन्यजीवों का संदेश
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस अवसर पर कहा कि आगामी 8 फरवरी को अलवर में आयोजित होने वाली इंटरनेशनल टाइगर मैराथन का मुख्य उद्देश्य बाघ संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाना है। उन्होंने जोर दिया कि ऐसे आयोजन न केवल शारीरिक फिटनेस को बढ़ावा देते हैं, बल्कि हमें अपनी प्राकृतिक विरासत की रक्षा के लिए भी प्रेरित करते हैं।
इस मैराथन में देश-विदेश से 25,000 से अधिक धावकों के शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें युवा, बच्चे और वरिष्ठ नागरिक सभी उत्साह के साथ हिस्सा लेंगे। मंत्री ने बताया कि विदेशी मेहमानों की मौजूदगी इस आयोजन को वैश्विक मंच प्रदान करेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अभिनेता रणदीप हुड्डा ने इस पहल पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि अलवर दुनिया की पहली ऐसी मैराथन की मेजबानी कर रहा है, जो विशेष रूप से बाघ संरक्षण को समर्पित है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि सरिस्का, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का एकमात्र बाघ अभयारण्य है, इस महत्वपूर्ण आयोजन का केंद्र बन रहा है।
हुड्डा ने आगे बताया कि यह इवेंट फिटनेस के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण को भी बढ़ावा देगा, जिससे स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता बढ़ेगी। दक्षिण अफ्रीका, केन्या और इथियोपिया जैसे देशों के पेशेवर धावकों की भागीदारी से अलवर अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर अपनी एक अलग पहचान बनाएगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें यह एक ऐसा प्रयास है जो पर्यटन और पर्यावरण चेतना दोनों को एक साथ साधता है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलवर की नई पहचान
इंटरनेशनल टाइगर मैराथन सिर्फ एक खेल आयोजन भर नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के साथ हमारे संबंधों को मजबूत करने का एक माध्यम है। यह दर्शाता है कि कैसे खेल के जरिए हम गंभीर पर्यावरणीय मुद्दों पर जनमानस का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं। इस पहल से उम्मीद है कि आने वाली पीढ़ियां भी बाघों और उनके प्राकृतिक आवासों के महत्व को समझेंगी और उनके संरक्षण में अपना योगदान देंगी। यह आयोजन अलवर को एक ऐसे शहर के रूप में स्थापित करेगा, जो पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को बखूबी समझता है और उसे निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। देशज टाइम्स बिहार का N0.1 आपको इस तरह की सकारात्मक खबरों से हमेशा अवगत कराता रहेगा।



