Egg Safety: जीवन की थाली में परोसे गए यह प्रोटीन के स्रोत, कहीं सेहत के लिए अदृश्य खतरा तो नहीं बन रहे हैं? बक्सर जिले में अंडों और पोल्ट्री कारोबार में एक ऐसा ही गंभीर सवाल खड़ा हो गया है, जहां प्रतिबंधित एंटीबायोटिक ‘नाइट्रोफ्यूरान’ की मौजूदगी की आशंका के बावजूद कोई जांच नहीं हो रही है। देश के कई हिस्सों में अंडों में नाइट्रोफ्यूरान नामक प्रतिबंधित एंटीबायोटिक के अवशेष पाए जाने की खबरें सामने आई हैं, जिसके बाद से उपभोक्ताओं की चिंताएं बढ़ गई हैं।
Egg Safety: क्या है नाइट्रोफ्यूरान और क्यों है यह खतरनाक?
नाइट्रोफ्यूरान एक प्रकार का एंटीबायोटिक है जिसका उपयोग आमतौर पर पशुओं में संक्रमण के इलाज के लिए किया जाता है। हालांकि, इंसानों में इसके सेवन से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें कैंसर और अन्य दीर्घकालिक रोग शामिल हैं। इसी कारण से भारत सहित कई देशों में खाद्य पशुओं में इसके उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके बावजूद, बक्सर में मुर्गी और अंडे का कारोबार पूरी तरह से बेरोकटोक जारी है। यहां न तो अंडों के सैंपल लिए जा रहे हैं और न ही किसी प्रकार की कोई जांच की जा रही है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
स्थानीय प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की इस लापरवाही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जब देश के अन्य हिस्सों में इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं, तो बक्सर में अभी तक जांच के आदेश क्यों नहीं पहुंचे, यह एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। जिले के बाजारों में हर दिन हजारों अंडे और बड़ी मात्रा में चिकन बिक रहा है, जिनकी गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर कोई निगरानी नहीं है। यह सीधे तौर पर आम लोगों की खाद्य सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।
जांच की कमी और बढ़ते खतरे
जानकार बताते हैं कि पोल्ट्री फार्मों में लागत कम करने और मुर्गियों को बीमारियों से बचाने के लिए कई बार अवैध रूप से प्रतिबंधित एंटीबायोटिक का इस्तेमाल किया जाता है। ये एंटीबायोटिक मुर्गियों के मांस और अंडों में जमा हो जाते हैं, जो अंततः मानव शरीर में प्रवेश कर गंभीर बीमारियों को जन्म देते हैं। इस मामले में जिला प्रशासन की उदासीनता चिंताजनक है। विभाग का कहना है कि उन्हें अभी तक राज्य या केंद्र से नाइट्रोफ्यूरान जांच के संबंध में कोई विशेष आदेश नहीं मिला है।
यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब हम देखते हैं कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अंडे और चिकन की खपत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में, बिना किसी जांच और निगरानी के इन खाद्य पदार्थों का सेवन करना लोगों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा जोखिम पैदा कर सकता है। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अधिकारियों को तत्काल इस दिशा में कदम उठाने और अंडों व चिकन की नियमित जांच सुनिश्चित करने की आवश्यकता है ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और स्वस्थ भोजन मिल सके। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।




