
छपरा के लाल छोटू शर्मा वीरगति को प्राप्त! चार माह पहले ही हुई थी शादी, देश के लिए अंतिम बलिदान: छोटू शर्मा ने भारतीय सेना में दिखाया अदम्य साहस, सुहाग उजड़ गया। चार माह पहले हुई शादी, आज वीरगति की खबर! छपरा का छोटू शर्मा बना भारत मां का नायक। जवान छोटू शर्मा ने सीमा पर दिया सर्वोच्च बलिदान– अदम्य साहस की मिसाल, गांव में रो-रो कर मातम।@छपरा,देशज टाइम्स।
सारण के लाल छोटू शर्मा ने भारत मां की रक्षा में दिया सर्वोच्च बलिदान
छपरा,देशज टाइम्स। पाकिस्तान की हरकतें लगातार बढ़ती जा रही हैं और सीजफायर उल्लंघन के मामले अक्सर सुर्खियों में आते रहते हैं। इसी कड़ी में जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना की देशभक्ति और साहस का एक और उदाहरण सामने आया। सारण जिले के दरियापुर प्रखंड, बेला पंचायत के बेला शर्मा टोला निवासी छोटू शर्मा ने देश की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त कर ली।
छोटू शर्मा का वीरता पूर्ण संघर्ष
छोटू शर्मा भारतीय सेना में तैनात थे और सीमा क्षेत्र में पाकिस्तानी रेंजर्स से मुकाबला करते समय उन्होंने अदम्य साहस और बलिदान का परिचय दिया। छोटू शर्मा चार भाइयों में तीसरे नंबर के भाई थे। उनके पिता स्वर्गीय रमेश शर्मा का निधन पहले ही हो चुका था। परिवार में छोटू की चार महीने पहले ही शादी हुई थी, और उनका सुहाग अभी ताजा था। छोटू के वीरगति की सूचना मिलते ही उनके परिवार में चीख-पुकार मच गई। इस क्षण ने परिवार और गांव के लोगों को गहरे दुःख में डुबो दिया।
परिवार और गांव की प्रतिक्रिया
छोटू के साहस और त्याग पर गांववाले गर्व महसूस कर रहे हैं। छोटे गांव में लोग उन्हें सारण के लाल के रूप में याद कर रहे हैं। परिवार के सदस्य, खासकर पत्नी और भाइयों का रो-रो कर बुरा हाल है। समाज और स्थानीय लोग उनकी वीरता और देशभक्ति को सम्मान की दृष्टि से देख रहे हैं। गांव के बुजुर्गों ने कहा कि छोटू जैसे जवानों की वजह से ही देश सुरक्षित है और उनकी वीरगति को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
भारतीय सेना और देश के लिए योगदान
छोटू शर्मा ने न केवल परिवार और गांव का गौरव बढ़ाया, बल्कि भारत मां की सीमाओं की रक्षा में भी अपनी सर्वोच्च भूमिका निभाई। उन्होंने सीमा पर दुश्मनों के खिलाफ डटे रहकर देश की सुरक्षा सुनिश्चित की। उनकी वीरता और बलिदान देश के नौजवानों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगे। सेना अधिकारियों ने भी छोटू के अदम्य साहस की सराहना की और उन्हें शौर्य सम्मान देने की प्रक्रिया शुरू की।
सैनिकों के परिवारों का दुःख और समाज का संदेश
छोटू की वीरगति यह संदेश देती है कि देशभक्ति और सेवा का मार्ग कठिन है, लेकिन इसके मूल्य अनमोल हैं। उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन छोटू ने अपने बलिदान से परिवार और जिले का नाम रोशन किया। गांव और आसपास के क्षेत्र में उनके साहस और त्याग की चर्चा हो रही है। स्थानीय लोग कहते हैं कि छोटू के बलिदान से यह साबित होता है कि सीमा सुरक्षा केवल सैन्य जिम्मेदारी नहीं, बल्कि देशभक्ति का सर्वोच्च उदाहरण है।