देशज टाइम्स, दरभंगा ब्यूरो रिपोर्ट। दरभंगा में स्टार्टअप क्रांति : Darbhanga College of Engineering के 18 Innovations Ideas को Bihar Government से ₹10 Lakh|
उत्तर बिहार में स्टार्टअप क्रांति के सूत्रधार बने दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के होनहार…
उत्तर बिहार में स्टार्टअप क्रांति के सूत्रधार बने दरभंगा कॉलेज (Darbhanga College of Engineering) ऑफ इंजीनियरिंग से निकले 18 नवाचारों ने साबित कर दिया कि हम सभी छात्र नौकरी देने वाले इनोवेटर बनेंगे। 18 आइडियाज को फंडिंग मंज़ूर होने के साथ ही, दरभंगा के युवाओं के सपनों को नव पंख मिला है।
इसका श्रेय कॉलेज के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) संदीप तिवारी और…
इसका श्रेय कॉलेज के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) संदीप तिवारी और इनक्यूबेशन इंचार्ज अंकित कुमार को जाता है। पढ़िए दरभंगा की सफलता का लहराता परचम…MIITIE सेंटर से स्टार्टअप्स को मिलती एक नई दिशा…
DCE दरभंगा के लिए यह ऐतिहासिक उपलब्धि
यह दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (DCE) के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। संस्थान से जुड़े 18 नवाचार आधारित स्टार्टअप आइडियाज को बिहार सरकार की स्टार्टअप नीति (Startup Policy Bihar) के तहत ₹10 लाख प्रति स्टार्टअप की फंडिंग के लिए चयनित किया गया है।
DCE दरभंगा के 18 स्टार्टअप आइडियाज को बिहार सरकार से ₹10 लाख की फंडिंग, मिथिला में स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा बड़ा बल
ये सभी स्टार्टअप अब DCE के MIITIE (Mithila Institute of Inclusive Technological Innovation and Entrepreneurship) Incubation Centre में इनक्यूबेट (Incubate) किए जाएंगे।
दरभंगा और मिथिला के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए ऐतिहासिक क्षण
यह उपलब्धि न केवल DCE बल्कि पूरे दरभंगा और मिथिला क्षेत्र के लिए एक बड़ी छलांग मानी जा रही है। इससे क्षेत्र में नवाचार (Innovation), स्वरोजगार (Self-employment) और टेक्नोलॉजी आधारित उद्यमिता (Technology-based Entrepreneurship) को नई ऊर्जा मिलेगी।
पहले वर्ष के छात्र भी चयनित
चयनित स्टार्टअप आइडियाज में पहले वर्ष के छात्र और एक पासआउट छात्र भी शामिल हैं:
प्रियंशु झा (सिविल इंजीनियरिंग, प्रथम वर्ष) – एक ऐसा प्लेटफॉर्म विकसित कर रहे हैं जो घरेलू और औद्योगिक कचरे के निष्पादन व पुनर्चक्रण (Waste Management and Recycling) को आसान बनाएगा। उपभोक्ताओं को कचरे का उचित मूल्य और बिक्री की सुविधा प्रदान करेगा।
रिचा और उनकी टीम – मायसेलियम आधारित जैविक पैकेजिंग सामग्री (Mycelium-based Biodegradable Packaging) पर काम कर रही हैं। यह सस्टेनेबल पैकेजिंग स्टार्टअप्स के लिए लागत कम करने में मदद करेगा, जो अभी महंगी और आयातित पैकेजिंग पर निर्भर हैं।
विविध क्षेत्रों से जुड़े इनोवेटिव स्टार्टअप्स
चयनित अन्य स्टार्टअप्स के क्षेत्र:
फूड टेक्नोलॉजी (Food Technology)
एजु-टेक (EduTech)
एग्री-टेक (AgriTech)
हेल्थ टेक (HealthTech)
सस्टेनेबल प्रोडक्ट्स (Sustainable Products)
ये सभी स्टार्टअप न केवल बाजार की मांग को पूरा करेंगे, बल्कि समाजोपयोगी समाधान (Socially Beneficial Solutions) भी प्रदान करेंगे।
MIITIE इनक्यूबेशन सेंटर की अहम भूमिका
MIITIE Incubation Centre ने पिछले एक वर्ष से छात्रों को:
मेंटोरशिप (Mentorship)
ट्रेनिंग (Training)
नेटवर्किंग (Networking)
फंडिंग गाइडेंस (Funding Guidance)
जैसी सुविधाएं प्रदान करना शुरू किया था। इसी प्रयास का परिणाम है कि इतनी बड़ी संख्या में आइडियाज चयनित हो सके।
संस्थान के अधिकारियों की प्रतिक्रियाएं
इनक्यूबेशन इंचार्ज अंकित कुमार (सहायक प्राध्यापक, मैकेनिकल विभाग) ने कहा:
“यह पहली बार है जब इतने सारे छात्र स्टार्टअप फंडिंग के लिए चयनित हुए हैं। अब हमारी प्राथमिकता इन आइडियाज को मजबूत स्टार्टअप्स में बदलने की है।”
कॉलेज के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) संदीप तिवारी ने चयनित सभी टीमों को बधाई देते हुए कहा:
“DCE का उद्देश्य सिर्फ डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि रोज़गार देने वाले इनोवेटर तैयार करना है। यह सफलता उसी दिशा में एक ठोस कदम है।”
उत्तर बिहार में स्टार्टअप संस्कृति को मिलेगा नया आयाम
DCE में छात्रों को:
आइडिया डेवलपमेंट (Idea Development)
पिचिंग ट्रेनिंग (Pitching Training)
बिजनेस प्लानिंग (Business Planning)
मेंटर्स से कनेक्शन (Mentor Connections)
फंडिंग अप्लाई करने की मदद (Funding Assistance)
हर स्तर पर सहयोग मिल रहा है।
यह पहल निश्चित ही उत्तर बिहार के स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त और जीवंत बनाएगी।