
बिरौल,दरभंगा देशज टाइम्स: चेन्नई से एक ताबूत दरभंगा के बिरौल स्थित भवानीपुर गांव पहुंचा और अपने साथ ले आया खुशियों का मातम. 45 वर्षीय संजीत राम की अचानक मौत से पूरा परिवार सदमे में है, सात बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है. घर का इकलौता कमाने वाला इस तरह अचानक दुनिया छोड़ देगा, किसी ने सोचा भी नहीं था.
बिरौल प्रखंड के भवानीपुर गांव में उस वक्त कोहराम मच गया जब चेन्नई से 45 वर्षीय संजीत राम का शव पहुंचा. परिजनों की चीख-पुकार से पूरा गांव गमगीन हो गया. संजीत राम एक निजी कंपनी में सुरक्षा गार्ड के पद पर कार्यरत थे, लेकिन अब उनका परिवार पूरी तरह से बेसहारा हो गया है.
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
जानकारी के अनुसार, लगभग दो साल पहले संजीत राम ने अपनी बड़ी बेटी की शादी की थी. परिवार का भरण-पोषण करने के लिए वह चेन्नई गए थे. उनकी कमाई पर ही पत्नी पुनिता देवी और तीन पुत्रों व चार पुत्रियों समेत पूरा घर निर्भर था. संजीत हर महीने अपनी पत्नी और बच्चों को आर्थिक सहायता भेजते थे, जिससे घर का खर्च चलता था.
संजीत के बड़े पुत्र पवन कुमार राम ने बताया कि उनके पिता की कमाई से ही घर चलता था. अब परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और भविष्य अनिश्चित हो गया है.
आखिरी बातचीत में की थी भविष्य की बातें
पुनिता देवी ने बताया कि उन्हें संजीत की मृत्यु की सूचना 4 दिसंबर को मिली. उसी दिन रात में उनकी अपने पति से फोन पर बात हुई थी. संजीत ने घर का हालचाल पूछा था और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई व खाने-पीने के लिए पैसे भेजने की बात कही थी.
पुनिता देवी ने यह भी बताया कि उनकी एक और बेटी की शादी मार्च 2026 में तय थी, जिसकी तैयारियां चल रही थीं. संजीत की अचानक मृत्यु ने इन सभी योजनाओं पर पानी फेर दिया है और पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है.
मौत की वजह पर सस्पेंस बरकरार
संजीत राम की मृत्यु के कारणों के बारे में अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है. परिजनों को भी इस संबंध में कोई विशेष सूचना नहीं दी गई है. इस रहस्यमयी मौत से पूरे गांव में शोक की लहर है और लोग स्तब्ध हैं.
प्रशासन से मुआवजे की मांग
भवानीपुर की पूर्व मुखिया पल्लवी ने इस घटना पर दुख जताते हुए बताया कि इसकी जानकारी अंचल प्रशासन को दी गई थी, लेकिन कोई भी कर्मी मौके पर नहीं पहुंचा. उन्होंने जिला प्रशासन से मृतक के परिजनों को सरकारी मुआवजा देने की मांग की है, ताकि इस विपत्ति की घड़ी में परिवार को कुछ सहारा मिल सके.






