
International Women’s Day: जब आधी रात तक गांव की पगडंडियों पर कला और जागरूकता की महफिल सजी, तो समाज ने भी बदलते दौर की नई सुबह का अहसास किया। अलीनगर प्रखंड के नरमा नावानगर पंचायत स्थित श्यामपुर गांव में स्नातक कृषि विज्ञान के छात्रों ने रविवार को ऐसा ही एक यादगार कार्यक्रम आयोजित कर ग्रामीणों को जागरूक किया, जिसकी चर्चा चारों ओर हो रही है।
International Women’s Day पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मन मोहा
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि, अलीनगर प्रखंड कृषि विभाग के प्रतिनिधि अख्तर अली और विशिष्ट अतिथि, शिक्षक संघ के नेता शंभू यादव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद कृषि के छात्र-छात्राओं ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों को कला के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिनमें शामिल थे:
- गणेश वंदना पर आधारित मनमोहक झांकी
- दहेज प्रथा के अभिशाप पर चोट करता नुक्कड़ नाटक
- कृषि कार्य के महत्व को दर्शाता एक विशेष नाटक
- शिव तांडव पर ऊर्जावान प्रस्तुति
- रामायण के पात्रों पर आधारित एक अनूठा फैशन शो
- छठ पूजा के धार्मिक व वैज्ञानिक महत्व पर नाटक
- नशामुक्त समाज की अपील करता एक प्रेरणादायक नाटक
इन प्रस्तुतियों में संतोषी कुमारी, संगीता कुमारी, मनीषा कुमारी, चन्द्ररेखा कुमारी, पूजा कुमारी, सपना कुमारी, तुलसी कुमारी, निधि कुमारी, आदर्श कुमार, सूरज मुखिया, नितीश, मानित, मंजीत और मुकेश कुमार जैसे कई छात्रों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा स्मृति चिन्ह और मेडल देकर सम्मानित किया गया।
कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएं: मुख्य अतिथि
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि अख्तर अली ने आयोजकों की सराहना की और बच्चों के प्रदर्शन को अद्भुत बताया। उन्होंने कहा, “कृषि के क्षेत्र में छात्रों के लिए बहुत सारी संभावनाएं हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी के अभाव में बच्चे इसमें रुचि नहीं दिखा पाते हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर बच्चे बीएससी एग्रीकल्चर करते हैं, तो उनके लिए रोजगार के कई दरवाजे खुल जाते हैं। उन्होंने कहा, “हमारे यहां के अधिकांश किसान अभी भी खेती कमाने के लिए नहीं, बल्कि खाने के लिए करते हैं। इसे वैज्ञानिक तकनीक और नकदी फसलों से जोड़कर लाभकारी बनाने की जरूरत है।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने छात्रों को कभी हार न मानने के लिए भी प्रेरित किया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
बदलते समाज की मिसाल बनीं बेटियां
विशिष्ट अतिथि शंभू यादव ने अपने संबोधन में कहा कि महिला दिवस पर ऐसा आयोजन सराहनीय है, लेकिन उससे भी बड़ी बात यह है कि जिस समाज में कभी बेटों की शिक्षा की भी चिंता नहीं की जाती थी, वहां अब बेटियां भी पढ़ रही हैं। उन्होंने कहा, “यह बदलते हुए गांव और समाज का प्रतीक है। इसके लिए सभी ग्रामीण बधाई के पात्र हैं।” उन्होंने इस भव्य आयोजन के लिए कृषि विज्ञान के छात्र संदीप मुखिया और छात्रा प्रियंका कुमारी को विशेष रूप से बधाई दी। कार्यक्रम में समाजसेवी एमए सारिम ने भी अपने विचार रखकर प्रतिभागियों का मनोबल बढ़ाया। इस अवसर पर समाजसेवी अल्ताफ हैदर, जेकेएसएसवी मंच के अध्यक्ष निर्भय यादव, उपाध्यक्ष विजय कुमार देव, इन्द्र कुमार मुखिया, पंकज कुमार साहू, मनीष कुमार देव, सरपंच श्याम कुमार राम, अब्दुस्सलाम, बैजू पूर्वे और रामविलास सदा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष और छात्र-छात्राएं देर रात तक उपस्थित रहे।



