



Ahalya Sthan Festival: मिथिला की पावन धरा पर एक बार फिर आस्था और कला का संगम होने को है। कमतौल स्थित पौराणिक अहल्यास्थान मंदिर परिसर में 14वें अहल्या गौतम महोत्सव की सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यह महोत्सव न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि कला और संस्कृति के प्रेमियों के लिए भी एक बड़ा आकर्षण है। कमतौल में गूंजेगा अहल्या स्थान फेस्टिवल का जयघोष: भव्य महोत्सव की तैयारियां पूरी, पर्यटन मंत्री करेंगे उद्घाटन। अहल्या स्थान फेस्टिवल की तैयारियों का अधिकारियों ने लिया जायजा। नौ जनवरी, शुक्रवार से शुरू होने वाले इस तीन दिवसीय भव्य आयोजन के लिए गुरुवार को तैयारियों का अंतिम जायजा लिया गया। अपर समाहर्ता (एडीएम) सलीम अख्तर सहित कई प्रशासनिक अधिकारियों और न्यास समिति के सदस्यों ने कार्यक्रम स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया।
इस दौरान मंच, पंडाल, अतिथियों, कलाकारों और दर्शकों के आवागमन के लिए की गई बैरिकेडिंग, ड्राप गेट, पार्किंग जैसी सभी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने नाश्ता, भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का भी मुआयना किया और सफल आयोजन के लिए जुटे लोगों को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।न्यास समिति के अध्यक्ष बालेश्वर ठाकुर ने बताया कि महोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार सुबह अहल्या पूजन के साथ होगा। इसके बाद गाजे-बाजे के साथ एक भव्य कलश शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो गौतमाश्रम तक जाएगी। वहां से कलश में जल भरकर शोभायात्रा वापस अहल्यास्थान आएगी। इसके उपरांत शोभायात्रा में शामिल कन्याओं को भोजन कराया जाएगा।देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करेंकलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियां और उद्घाटन समारोहदोपहर बाद चार बजे से देर शाम तक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा। इस दौरान बजरंग म्यूजिकल ग्रुप के कलाकार अपनी गायकी से दर्शकों का मन मोहेंगे। प्रसिद्ध मैथिली गायक कुंज बिहारी मिश्र और क्षेत्रीय व भोजपुरी गायक अमर आनंद अपनी प्रस्तुतियों से कड़ाके की सर्द रात में भी दर्शकों को गर्माहट का एहसास कराएंगे। इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मिथिला की समृद्ध कला परंपरा जीवंत हो उठेगी, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।महोत्सव का विधिवत उद्घाटन बिहार के पर्यटन मंत्री डॉ. अरुण शंकर प्रसाद करेंगे। इस अवसर पर कई विशिष्ट अतिथि भी उपस्थित रहेंगे, जो इस भव्य आयोजन के साक्षी बनेंगे। यह महोत्सव मिथिला की गौरवशाली परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का एक अनूठा प्रयास है।



