Nawah Sankirtan: अलीनगर के नावानगर गांव में नौ दिनों तक चला भक्ति और आस्था का महापर्व नवाह संकीर्तन अब समाप्त हो गया है। इस दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा और आसपास के गांवों से हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। 17 मई से शुरू हुआ यह आयोजन मंगलवार को संपन्न हुआ, जिसमें नामधुन संकीर्तन के महामंत्र “हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे, हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे” की गूंज से पूरा क्षेत्र भक्ति में लीन हो गया।
पूरा दिन और रात, संकीर्तन स्थल से निकल रही नामधुन से नावानगर गांव का हर कोना गूंज रहा था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। विभिन्न गांवों की कीर्तन मंडली अपनी मधुर धुनों से लोगों को मंत्रमुग्ध कर रही थीं, जिन्हें सुनने के लिए चारों ओर से लोग स्वतः ही पूजा स्थल की ओर खींचे चले आते थे। यहां पहुंचकर लोग कीर्तन मंडलियों के साथ बैठकर नामधुन संकीर्तन में पूरी तल्लीनता के साथ मग्न हो जाते थे। यह कीर्तन अलीनगर प्रखंड के नावानगर गांव स्थित विषहारा भगवती मंदिर पर आयोजित किया गया था।
भक्तिमय नवाह संकीर्तन का अदभुत नजारा
इस नवाह संकीर्तन में आसपास के सभी गांवों की कीर्तन मंडलियों को निमंत्रण पत्र भेजा गया था। कीर्तन मंडलियों ने अपनी मधुर ध्वनि से लोगों को मंत्रमुग्ध करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इनमें कोथुॅ, आधारपुर, रूपनगर, नवटोल, नरमा, मिल्की, दाँथ, देउरी, अंदौली समेत कई गांवों की कीर्तन मंडली ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। कीर्तन का आयोजन समस्त ग्रामवासियों की ओर से किया गया था, जिन्होंने आगंतुक कीर्तन मंडलियों के स्वागत में कोई कमी नहीं छोड़ी। माता विषहारा भगवती के दिलौरी स्थान में, जो गांव के पूर्वी छोर पर स्थित एक रमणीय स्थान है, यह आयोजन संपन्न हुआ। गांव के प्रमुख लोगों जैसे रामनाथ झा, किशोरी झा, पप्पू झा, ओम झा, श्रीराम झा, रामकुमार मंडल, हरे राम झा, सुरेश झा समेत समस्त ग्रामवासियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। विशेष रूप से रात्रि 9 बजे के बाद आयोजित भगवती की आरती का मनोरम दृश्य आकर्षण का केंद्र बना रहता था, जिसमें हजारों की संख्या में महिलाएं, बच्चे, युवा और बुजुर्ग मौजूद रहते थे।
समापन समारोह में कलाकारों और संत का आगमन
नवाह यज्ञ का समापन मंगलवार दोपहर को हुआ। समापन कार्यक्रम को यादगार बनाने के लिए मैथिली कलाकार भवानी झा और सोनू दरभंगिया की टीम ने पहुंचकर अपनी सुर-लहरियों से चार चांद लगा दिए। वहीं, मिथिला के महान संत राम उदित दास मौनी बाबा ने भी आयोजन स्थल पर पहुंचकर समस्त ग्रामवासियों को सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। नवाह के समापन पर काफी संख्या में ब्राह्मण और कुमारी भोजन का भी आयोजन किया गया, जो इस धार्मिक अनुष्ठान की एक महत्वपूर्ण परंपरा है।
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