



आवेश आलम अररिया। Jeevika Health Center: अंधियारे में उम्मीद की लौ बनकर, अररिया सदर अस्पताल में जीविका की पहल ग्रामीण दीदियों के लिए वरदान साबित हो रही है। स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँच के इस दुर्गम सफर को जीविका ‘स्वास्थ्य सहायता केंद्र’ ने सुगम बना दिया है।
बिहार के अररिया जिले में, खासकर ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों से आने वाली जीविका दीदियों और उनके परिजनों के लिए सदर अस्पताल में संचालित जीविका ‘स्वास्थ्य सहायता केंद्र’ एक नया जीवनदान लेकर आया है। जीविका एवं स्वास्थ्य विभाग की यह संयुक्त पहल 3 फरवरी 2023 को शुरू हुई थी और तब से यह जीविका हेल्थ सेंटर लगातार हजारों जरूरतमंदों की मदद कर रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
जीविका हेल्थ सेंटर: ग्रामीण दीदियों का बना सहारा
यह केंद्र उन लोगों के लिए सेतु का काम करता है, जिन्हें अक्सर अस्पताल की प्रक्रियाओं को समझने और सही इलाज तक पहुंचने में कठिनाई होती है। अब तक, इस केंद्र के माध्यम से 26,533 से अधिक मरीजों को सहायता मिल चुकी है, जो इसकी उपयोगिता और सफलता का एक स्पष्ट प्रमाण है। यह पहल विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है जो आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों से आती हैं और जिन्हें अक्सर चिकित्सा सहायता के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
केंद्र पर तैनात जीविका स्वास्थ्य मित्र दो पालियों में कार्य करती हैं और लगातार ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में जुटी हैं। ये स्वास्थ्य मित्र न केवल मरीजों को अस्पताल में सही डॉक्टर तक पहुंचाते हैं, बल्कि उन्हें दवाइयां प्राप्त करने और अन्य चिकित्सा औपचारिकताओं को पूरा करने में भी सहायता प्रदान करती हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
दूरदराज के इलाकों तक पहुंच रही मदद की किरण
अररिया जैसे सीमांचल क्षेत्र में जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच एक चुनौती बनी हुई है, वहाँ यह केंद्र एक आशा की किरण बनकर उभरा है। जीविका दीदियों के सशक्तिकरण के साथ-साथ उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है। यह दर्शाता है कि कैसे सामुदायिक संगठन और सरकारी विभाग मिलकर दूरदराज के इलाकों में भी गुणवत्तापूर्ण ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस केंद्र ने स्वास्थ्य सेवा को अधिक सुलभ और समावेशी बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
केंद्र की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही दिशा में प्रयास किए जाएं, तो समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति तक भी मदद पहुंचाई जा सकती है। जीविका के माध्यम से महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अब वे अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य को लेकर भी अधिक जागरूक हो रही हैं। यह पहल बिहार में स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


