Child Marriage: समाज पर लगे इस घुन को अब जड़ से मिटाने की तैयारी है, जिसकी कमान आशा कार्यकर्ताओं के हाथ में सौंपी गई है। जिलाधिकारी के निर्देश पर केवटी में सौ दिवसीय ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान की शुरुआत हो गई है, जिसके तहत आशा एवं आशा फैसिलिटेटर के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
शनिवार को यह कार्यक्रम प्रखंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, केवटी में कार्ड्स संस्था के तत्वावधान में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रभारी चिकित्सा प्रभारी निर्मल कुमार, कार्ड्स के जिला समन्वयक नारायण कुमार मजुमदार और सेंटर डायरेक्ट संस्था की निशा कुमारी ने संयुक्त रूप से किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आशा कार्यकर्ताओं को बाल विवाह के खिलाफ कानूनी और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है।
Child Marriage रोकने के लिए क्या हैं कानूनी प्रावधान?
इस अवसर पर जिला समन्वयक नारायण कुमार ने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2012 का मुख्य उद्देश्य इस कुप्रथा को पूरी तरह से रोकना है। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत न केवल पीड़ितों को सहायता प्रदान की जाती है, बल्कि बाल विवाह को बढ़ावा देने वालों के लिए सजा का भी प्रावधान है। उन्होंने आगे कहा कि संबंधित अधिकारियों की नियुक्ति एवं न्यायपालिका की स्थापना की व्यवस्था भी इसी कानून का हिस्सा है।
पूरे देश में बाल विवाह के उन्मूलन के लिए सरकारी संस्थाओं को जिम्मेदारी दी गई है। इसी के आलोक में यह जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है ताकि लोगों को कानून की जानकारी हो सके और वे इस सामाजिक बुराई के खिलाफ आवाज उठा सकें। इस अभियान का लक्ष्य जमीनी स्तर पर बदलाव लाना है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
जागरूकता ही बनेगी सबसे बड़ा हथियार
इस सौ दिवसीय अभियान का केंद्र बिंदु आशा कार्यकर्ता हैं, जो घर-घर जाकर लोगों को बाल विवाह के दुष्प्रभावों के बारे में बताएंगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्हें कानूनी पहलुओं की भी जानकारी दी गई है ताकि वे किसी भी अप्रिय घटना की सूचना सही समय पर संबंधित अधिकारियों को दे सकें। यह प्रशिक्षण उन्हें इस सामाजिक बुराई के खिलाफ लड़ने के लिए और भी सशक्त बनाएगा और समाज को एक नई दिशा देगा।





