Baadh Pokhar Tourism: केवटी दरभंगा देशज टाइम्स। सदियों की धूल फांकती एक ऐतिहासिक धरोहर, मिथिला की भूमि पर अपने भव्य अतीत की कहानी कहती, अब भी अपनी पहचान के लिए तरस रही है। दरभंगा के केवटी प्रखंड का बाढ़ पोखर, जिसे पर्यटन के नक़्शे पर चमकना था, अभी तक इंतजार में है।
बाढ़ पोखर पर्यटन: मिथिला के ऐतिहासिक स्थल को पर्यटक हब बनाने का सपना कब होगा पूरा?
Baadh Pokhar Tourism: केवटी प्रखंड की लाल गंज पंचायत में स्थित ऐतिहासिक बाढ़ पोखर और मिथिला के महान राजा शिव सिंह के कृतित्व को पर्यटक स्थल बनाने का सपना अभी तक एक प्रश्नचिह्न बना हुआ है। बिहार में एनडीए की शानदार जीत के बाद, स्थानीय लोगों में एक बार फिर इस स्थल को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की उम्मीद जगी है।
बाढ़ पोखर पर्यटन: एक अधूरा सरकारी प्रयास
हालांकि, इसे पर्यटन स्थल बनाने की कवायद पहले भी शुरू हुई थी। प्रशासन की पहल के दौरान तत्कालीन दरभंगा आयुक्त संजीत कुमार के नेतृत्व में तत्कालीन जिलाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक हुई थी, जिसमें आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इस पर आवश्यक पहल करते हुए कुछ अतिक्रमण हटाया गया और पोखर के वास्तविक जलकर की पैमाइश भी की गई थी। मनरेगा विभाग द्वारा पोखर के भिंडे के कुछ हिस्सों में मिट्टीकरण का कार्य भी शुरू हुआ था। इस दौरान उक्त पोखर के भिंडे पर पतंग और नौका विहार प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद यह सारा कार्य अचानक ठंडे बस्ते में चला गया, जिससे लोगों को निराशा हाथ लगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
राजा शिव सिंह की विरासत और वर्तमान संकट
कथाओं और किंवदंतियों के अनुसार, चौदहवीं शताब्दी में तुगलक वंश के शासनकाल में मिथिला के राजा शिव सिंह ने क्षेत्र में भयंकर अकाल पड़ने पर पेयजल, सिंचाई और मजदूरों को रोजगार प्रदान करने के उद्देश्य से इस पोखर की खुदाई करवाई थी। काफी गहराई तक खुदाई के बावजूद जब पानी नहीं निकला, तो राजा ने पूजा-पाठ और यज्ञ आदि अनुष्ठान कराए, जिसके बाद जल प्रकट हुआ। इस धार्मिक पोखर के जल का उपयोग आसपास के सभी गांवों में पेयजल, पूजा-पाठ और भोजभात में किया जाता था। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें (https://deshajtimes.com/news/national/)।
लेकिन वर्तमान में पोखर के भिंडे की चारों ओर से खुदाई और अतिक्रमण के साथ-साथ बढ़ती गंदगी के कारण अब इसके स्वच्छ जल और अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यह मिथिला विरासत अपने मूल स्वरूप को खोने के कगार पर है। कुछ असामाजिक तत्वों ने सिकुड़ते जा रहे पोखर की जमीन का उपयोग श्मशान के रूप में भी करना शुरू कर दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

अधिकारियों और विधायक का आश्वासन: कब तक होगा समाधान?
स्थानीय भाजपा विधायक डॉ. मुरारीमोहन झा ने बताया कि ऐतिहासिक बाढ़ पोखर को पर्यटक स्थल बनाने की दिशा में लगातार पहल की जा रही है। इस संबंध में संबंधित विभाग को पहले भी लिखा गया है तथा संबंधित मंत्री से बातचीत भी हुई है। जब सीओ भास्कर कुमार मंडल से इस विषय में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि बाढ़ पोखर को पर्यटक स्थल बनाने की दिशा में अधिकांश प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बाढ़ पोखर जल्द ही एक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित होगा। यह देखना होगा कि यह प्राचीन मिथिला विरासत कब तक अपनी खोई हुई पहचान वापस पा पाती है और कब तक यह सिर्फ आश्वासन बनकर रह जाता है।


You must be logged in to post a comment.