

बिरौल देशज टाइम्स डिजिटल डेस्क। प्रखंड के बिरौल के मंदिर घाट में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन बाल व्यास श्रवण दास ने बताया कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जहां आप जा रहे हैं वहां आपका इष्ट या अपने गुरु का अपमान न हो।
यदि ऐसा होने की आशंका हो तो उस स्थान पर नहीं जाना चाहिए। चाहे व स्थान अपने जन्म दाता पिता का ही घर हो। कथा के दौरान सती चरित्र के प्रसंग को सुनाते हुए भगवान शिव की बात को नहीं मानने पर सती के पिता के घर से अपमानित होने के कारण स्वयं को अग्नि में स्वाहा होना पड़ा।
कथा के उत्तानपाद के वंश मे ध्रुव चरित्र की कथा को सुनाते हुए समझाया कि ध्रुव की सौतेली मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया जिससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया। परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य-संयम की नितांत आवश्यकता रहती है।
भक्त ध्रुव की ओर से तपस्या कर श्रीहरि प्रशन्न करने की कथा सुनाते हुए बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बन्धा नहीं है।भक्ति को बचपन में ही करने की प्ररेणा देना चाहिए क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है।उसे जैसे चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है।
कथा के दौरान बाल व्यास श्रवण दास ने बताया कि पाप है बाद कोई व्यक्ति नरक गामी हो,इसके लिए श्रीमद्भागवत में श्रेष्ठ उपाय प्रायश्चित बताया है। कथा वाचक ने महाभारत से जुड़े विभिन्न प्रसंग सुनाए। कथा के दौरान भजनों की प्रस्तुति दी।सात दिवसीय भागवत कथा का आयोजन रामबहादुर साह व द्रोपती देवी के परिसर मे किया गया है।


