
Lok Adalat: न्याय की देवी की आंखों पर भले ही पट्टी बंधी हो, लेकिन जब वो फैसला सुनाती हैं तो सालों पुराने विवाद भी मिनटों में सुलझ जाते हैं। कुछ ऐसा ही नज़ारा बेनीपुर न्यायालय परिसर में देखने को मिला, जहां वर्ष के पहले ही लोक अदालत में आपसी सुलह से लाखों के मामलों का निपटारा कर दिया गया।
Benipur Lok Adalat में 5 बेंचों का गठन
इस वर्ष के प्रथम लोक अदालत का उद्घाटन अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम सह अध्यक्ष, अनुमंडल विधिक सेवा समिति, माधवेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। मामलों के त्वरित और सुगम निपटारे के लिए कुल 5 बेंचों का गठन किया गया था, जिन्होंने दिन भर की कार्यवाही में 163 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया। इन सभी मामलों में कुल मिलाकर 72 लाख 54 हजार 56 रुपए की समझौता राशि तय हुई।
पहले बेंच पर एडीजे प्रथम माधवेन्द्र सिंह एवं अधिवक्ता सदस्य गजनफर अली खान ने सेंट्रल बैंक के चार और बैंक ऑफ इंडिया के दो मामलों में 1 लाख 20 हजार 500 रुपए का समझौता कराया। दूसरे बेंच की अध्यक्षता एडीजे द्वितीय ऋषि गुप्ता और अधिवक्ता सदस्य त्रिलोक नाथ झा ने की, जहाँ 16 शमनीय आपराधिक मुकदमे, तीन टेलिफोन बकाया और दो ट्रैफिक चालान के मामले निपटाए गए, जिसमें 8 हजार 958 रुपए का समझौता हुआ। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
विभिन्न बैंकों और विभागों के मामलों का हुआ निपटारा
तीसरे बेंच पर एसीजेएम संगीता रानी और अधिवक्ता सदस्य राममोहन झा ने 13 सुलहनीय आपराधिक मुकदमे, एक माप-तौल और एक ग्राम कचहरी से जुड़े मामले का निपटारा करते हुए पांच हजार रुपए जमा कराये। वहीं, चौथे बेंच पर एसडीजेएम अनुराग तिवारी एवं अधिवक्ता सदस्य अभय कांति की देखरेख में बिजली विभाग के 6 मुकदमों में 2 लाख 2 हजार 149 रुपए जमा हुए। इसी बेंच ने स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (एसबीआई) से जुड़े 45 ऋण संबंधी मामले में 39 लाख 6 हजार 34 रुपए का विशाल समझौता कराकर मामले को समाप्त किया।
पांचवें और अंतिम बेंच पर सिविल जज जूनियर डिवीजन रोहित कुमार गुप्ता एवं अधिवक्ता सदस्य मोहम्मद गुलाम जैनुल आबेदीन ने पंजाब नेशनल बैंक के 22 मामलों में 4 लाख 67 हजार 6 सौ रुपए का समझौता कराया। इसके अतिरिक्त, बिहार ग्रामीण बैंक से जुड़े 48 ऋण संबंधी मामले में 30 लाख 11 हजार 415 रुपए का समझौता हुआ, जो इस अदालत की एक बड़ी उपलब्धि रही। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस सफल आयोजन से न केवल न्यायालय का बोझ कम हुआ, बल्कि कई लोगों को लंबे समय से चले आ रहे विवादों से भी मुक्ति मिली। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

