

बेनीपुर। राष्ट्रीय महिला आयोग नई दिल्ली के तत्वावधान में बहेडा महाविद्यालय बहेड़ा के प्रांगण में रविवार को विविध अनैतिक संबंधों और घरेलू हिंसा विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन प्रचार्य शशिकांत पाठक की अध्यक्षता में किया गया।
सेमिनार में मौजुद शिक्षकों एंव छात्रों को संबोधित करते हुये एनसीडब्ल्यू नई दिल्ली के समन्वयक एएम रिजवी ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा अक्सर महिलाओं को अपने समुदायों के समाजिक आर्थिक और राजनितिक विकास में पुर्ण योगदान देने से रोकती हैं। महिलाओं को कभी भी शक की नजर से नहीं देखना चाहिये। आप अपने परिवार को स्वयं खुबसुरत बना सकते हैं, दूसरा नहीं।
कोलक्ता के वरिष्ट अधिवक्ता अब्दुल रजिक ने कहा
कि 1970 के दशक से ही आपराधिक न्याय प्रणाली ने घरेलू हिंसा को एक गंभीर अपराध के रुप में देखना शुरु कर दिया हैं, न की एक नीजी पारिवारिक मामले के रुप में। घरेलु हिंसा कोई भी शाररिक या मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार हैं जिसका उपयोग लोग अपने पूर्व या वर्तमान अंतरंग साथी के विरुद्ध करते हैं, यह कई आपराधिक व्यवहारों को संदर्भित करता हैं।
कि 1970 के दशक से ही आपराधिक न्याय प्रणाली ने घरेलू हिंसा को एक गंभीर अपराध के रुप में देखना शुरु कर दिया हैं, न की एक नीजी पारिवारिक मामले के रुप में। घरेलु हिंसा कोई भी शाररिक या मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार हैं जिसका उपयोग लोग अपने पूर्व या वर्तमान अंतरंग साथी के विरुद्ध करते हैं, यह कई आपराधिक व्यवहारों को संदर्भित करता हैं।
घरेलू हिंसा सभी जनसांख्यिकीय समुहों में होती हैं, हालांकि गैर घातक अंतरंग हिंसा की आधिकारिक दल 16 से 24 बर्ष के आयु की महिलाओं, सबसे कम आय वर्ग के घरों में महिलाओं और शहरी क्षेत्रों रहनेवाली महिलाओं में सबसे अधिक हैं। वहीं सेमिनार को संबोधित करते हुये रामेश्वर महाविद्यालय मुज्जफरपुर के प्रो महजबीन प्रवीण ने कहा की समाज में महिलाओं को कभी भी कमजोर नहीं समझना चाहिये।

महिलाओं को समानता एंव सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की दिशा में राष्टीय महिला आयोग आवश्यक अंग हैं, न्याय की उपल्बधता यह सुविधा रहित वर्गों की महिलाओं के लिये नितांत आवश्यक हैं महिलाओं को कानुनी अधिकारों का पुर्ण उपयोग करना चाहिये जिसके लिये उन्हें न केवल कानुनी प्रावधानों अपितु केन्द्र एंव राज्य सरकार द्वारा उनके हित के लिये चलाई जा रही आर्थिक, समाजिक व विकास योजनाओं से भी अवगत कराये जाने की आवश्यकता हैं।
सेमिनार में अपना विचार व्यक्त करते हुये बीआरए बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर के बोटनी विभाग के डॉ.आदित्या आभा सिंह ने कहा कि देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध एक विशेष रुप से गंभीर समस्या हैं। देश में महिलाओं की सुरक्षा घरों के अंदर व बाहर दोनों एक प्रमुख चिंता की विषय हैं। आय और धन के माध्यम से महिलाओं को शस्कत बनाये जाने से उनमें घरेलु हिंसा का शिकार होने की संभावना कम हो जाती हैं।
वहीं आर एम ए संस्कृत कालेज मुजफ्फुरपुर के डाॅ विणा मिश्र ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के साथ साथ पुरुष मानवीयकरण के लक्ष्य को भी सामने रखें घर में पिता ,पत्नी और बेटी, मां और बहन का सम्मान करें। वहीं बहेडा महाविद्यालय के प्रचार्य शशिकांत पाठक घरेलू हिंसा की समस्या पर अपना व्याख्यान देते हुये विभिन्न पक्षों से लोगों को अबगत कराया।
महाविद्यालय के साशि निकाय के अध्यक्ष रामनारायण ठाकुर ने सेमिनार में अपना विचार व्यक्त करते हुये कहा महिलाओं में शिक्षा के साथ ही संस्कार एंव जागरुकता के द्वारा घरेलू हिंसा की समस्या पर नियंत्रण संभव हो सकता हैं। वहीं महाविद्यालय के सचिव सुरेन्द्र झा ने छात्राओं को घरेलू हिंसा का सामना करने के लिये आत्म विश्वास एंव जागरुकता उत्पन्न करने लिये प्ररेरित किया। सेमिनार का संचालन डॉ राजचन्द्र झा ने किया।
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