
Bhagwat Katha: जैसे सागर में लहरें उठती हैं, ठीक वैसे ही कुशेश्वरस्थान के सतीघाट में आस्था का ज्वार उमड़ पड़ा है। यहां चल रही श्रीमद् भागवत प्रेम रस कथा के तीसरे दिन भक्ति और ज्ञान की त्रिवेणी में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा।
सतीघाट में Bhagwat Katha: भक्ति और ज्ञान का अनूठा संगम
कुशेश्वरस्थान के सतीघाट स्थित अनंत मनोरम निवास में आयोजित साप्ताहिक श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन, सोमवार को, कथा पंडाल भक्तों से खचाखच भर गया। कथाव्यास श्री हित सुकुमारी शरण जी ने अपनी ओजस्वी वाणी से कपिल-देवहूति संवाद का ऐसा सजीव वर्णन किया कि उपस्थित हर व्यक्ति भाव-विभोर हो गया। उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति और भक्ति योग के गूढ़ रहस्यों को सरल शब्दों में समझाया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

उन्होंने कहा कि इस भौतिकवादी युग में मनुष्य सांसारिक मोह-माया में उलझकर अपने जीवन के वास्तविक लक्ष्य से भटक गया है। ऐसे में श्रीमद् भागवत कथा जैसे धार्मिक प्रवचन हमें आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का मार्ग दिखाते हैं। उनके उपदेशों का सार यह था कि मानव जीवन का परम उद्देश्य आत्मज्ञान प्राप्त कर ईश्वर की भक्ति में लीन होना है।
कथा के मध्य, “राधे-राधे” और “हरि बोल” के जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। आयोजन समिति ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए बैठने से लेकर पेयजल तक की उत्तम व्यवस्था की गई है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भव्य आयोजन, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।, श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
क्या है मानव जीवन का मूल उद्देश्य?
कथाव्यास ने कपिल भगवान के उपदेशों का जिक्र करते हुए बताया कि भक्ति ही एकमात्र ऐसा सरल और सुगम मार्ग है, जिससे कोई भी जीव जन्म और मृत्यु के अंतहीन चक्र से मुक्ति पा सकता है। उन्होंने आज के समय में ऐसे आयोजनों की महत्ता पर बल दिया।
यह कथा प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित की जा रही है और इसका समापन 26 मार्च को होगा। आयोजन समिति ने क्षेत्र के सभी धर्मप्रेमी लोगों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में कथा पंडाल में पहुंचकर इस अमृत वर्षा का लाभ उठाएं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







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