

कुशेश्वरस्थान, देशज टाइम्स। वंशावली का फैसला होने तक बाबा कुशेश्वर नाथ गर्भगृह होगा न्याय समिति के अधीन। गर्भगृह में नही जायेगे कोई भी पंडा। बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष अखिलेश कुमार जैन का आदेश।
प्राप्त जानकारी के अनुसार उच्च न्यायालय में 23 जनवरी 1924 के प्रथम अपील में पारित किया गया कि पंडा समाज के व्यक्तियों को गर्भगृह में चढ़ने वाली राशि का आपस मे बंटवारे के संबंध में था। इसके बाद मुकदमा में जो पक्षकार थे उनके लगभग 50 से अधिक परिवार अब हिस्सेदारी का दावा कर रहे है। जिसको लेकर उक्त परिवारों के बीच आये दिन आपस मे टकराव होती रहती है।
वहीं उच्च न्यायालय के निर्देश के आलोक में धार्मिक पर्षद के द्वारा सभी पक्षकारों के सहमति के आधार पर एक वंशावली के लिए पिछले 6 माह से प्रयास किया जा रहा है। लेकिन प्रत्येक निर्धारित तिथि को कुछ न कुछ आपत्ति कर तिथि को आगे बढ़ाने का प्रयास पंडा समाज के द्वारा किया जा रहा है। वहीं बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद अपने आदेश में लिखते है कि पर्षद के समक्ष अन्य पंडा समाज के कुछ लोगो ने आपत्ति जाहिर किया कि पंडा समाज के चार से पांच व्यक्ति का समूह की ओर से अनाधिकृत रूप से गर्भगृह में बैठकर पैसे की उगाही करते हैं। न्यास पर्षद से समय पर समय की मांग करते रहते हैं।
पंडा के द्वारा गर्भगृह की राशि का कब्जा और टकराव की स्थिति को देखते हुए बिहार न्यास पर्षद के अध्यक्ष श्री जैन ने बाबा कुशेश्वर नाथ न्यास समिति के अध्यक्ष सह एसडीओ संजीव कुमार कापर को पत्र भेजकर कार्रवाई के लिए आदेश दिया कि जब तक पंडा समाज की ओर से वंशावली नही दी जाती है, तब तक बाबा कुशेश्वरनाथ का गर्भगृह न्यास समिति के अधीन ही रहेगा।
अब देखने वाली बात यह है कि बिहार राज्य धार्मिक न्यास के अध्यक्ष के इस आदेश का बाबा कुशेश्वर नाथ न्यास के अध्यक्ष किस हद तक पालन करते है। जानकार बताते हैं कि अगर यह आदेश पारित किया जाता है तो बाबा कुशेश्वर नाथ मंदिर का सारा विवाद ही समाप्त हो जायेगा।


