

Darbhanga News: जिन कंधों पर बस्ते का बोझ होना चाहिए, वे ईंटें ढो रहे हैं और जिन हाथों में कलम होनी चाहिए, वे झूठे बर्तन मांज रहे हैं। दरभंगा में बाल मज़दूरी के इस अभिशाप को खत्म करने के लिए प्रशासन ने अब कमर कस ली है। इसी कड़ी में बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के माननीय उपाध्यक्ष श्री अरविंद कुमार सिंह ने दरभंगा परिसदन में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें श्रम संसाधन, पुलिस विभाग और युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग के आला अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले को बाल श्रम से पूरी तरह मुक्त कराना था।
Darbhanga News: जानिए क्या कहते हैं आंकड़ें और कैसे हो रही है कार्रवाई
बैठक के दौरान माननीय उपाध्यक्ष ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक दरभंगा जिले के अलग-अलग इलाकों से कुल 31 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया जा चुका है। यह एक बड़ी सफलता है, लेकिन अभी भी बहुत काम बाकी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाल मज़दूरी कराने वाले नियोजकों के खिलाफ किसी भी तरह की नरमी न बरती जाए।

सभी दोषी नियोजकों के विरुद्ध संबंधित थानों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके अलावा, उन सभी नियोजकों से 20,000 रुपये की जुर्माना राशि वसूलकर जिला बाल श्रम पुनर्वास कल्याण कोष में जमा कराई गई है। जो भी नियोक्ता यह राशि जमा करने में आनाकानी कर रहे हैं, उनके खिलाफ नीलाम-पत्र वाद के तहत अलग से सख्त कार्रवाई की जा रही है।
मुक्त कराए गए बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। सभी बच्चों का नामांकन उनके घर के पास के स्कूलों में कराया गया है ताकि उनकी शिक्षा फिर से शुरू हो सके। श्रम संसाधन विभाग की ओर से उन्हें 3,000 रुपये की तत्काल सहायता राशि भी प्रदान की गई है। साथ ही, मुख्यमंत्री राहत कोष से प्रत्येक बच्चे के लिए 25,000 रुपये की सावधि जमा (Fixed Deposit) कराई गई है, जो उन्हें 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर मिलेगी।
बच्चों का भविष्य संवारने पर सरकार का जोर
सरकार का प्रयास केवल बच्चों को मुक्त कराना ही नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि वे दोबारा इस दलदल में न फंसे। इसके लिए उनके परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। श्री सिंह ने बताया कि ऐसे सभी परिवारों को राशन कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड और लेबर कार्ड जैसी सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है ताकि उनकी आजीविका चलती रहे और बच्चों को काम करने पर मजबूर न होना पड़े। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस पहल का उद्देश्य उस जड़ को ही खत्म करना है, जहां से बाल श्रम जैसी कुप्रथा जन्म लेती है।
अधिकारियों को मिले सख्त निर्देश, ईंट भट्ठों पर रहेगी विशेष नजर
आयोग के उपाध्यक्ष ने बैठक में मौजूद सभी अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि जिले में बाल मज़दूरी को जड़ से खत्म करने के लिए एक ठोस रणनीति के तहत काम करना होगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सप्ताह कम से कम दो दिन सभी प्रखंडों में रोस्टर के आधार पर धावा दल की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने विशेष रूप से जिले के सभी ईंट भट्ठों का लगातार निरीक्षण करने का निर्देश दिया, क्योंकि अक्सर ऐसी जगहों पर बड़ी संख्या में बाल श्रमिक काम करते पाए जाते हैं। उन्होंने साफ कहा कि अगर ईंट भट्ठों पर कोई बच्चा काम करता पाया गया तो उसे तत्काल मुक्त कराकर नियोजकों पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “बच्चे देश का भविष्य हैं और उनका स्थान स्कूल और खेल के मैदान में है, न कि किसी होटल, गैराज या फैक्ट्री में।” हम सभी का यह सामूहिक दायित्व है कि हर बच्चे को उसका बचपन लौटाएं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




