



MNREGA scheme: गरीबों के पेट की आग बुझाने वाली योजना अब अधिकारियों के लिए तिजोरी भरने का जरिया बन गई है। दरभंगा के जाले प्रखंड के कमतौल से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां फर्जी मास्टर रॉल के सहारे लाखों का वारा-न्यारा कर दिया गया।
दरभंगा जिले के कमतौल स्थित ढढ़िया-बेलवाड़ा पंचायत में मनरेगा योजना के तहत हुए काम में बड़ी वित्तीय अनियमितता उजागर हुई है। मनरेगा लोकपाल ने वर्ष 2023-24 में पंचायत समिति सदस्य मद से लागू की गई दो योजनाओं में गबन की पुष्टि करते हुए, इसमें शामिल पांच मनरेगाकर्मियों से 15 लाख 20 हजार 460 रुपये की वसूली का आदेश दिया है। कार्यक्रम पदाधिकारी, जाले को यह राशि वसूल कर एसईजीएफ खाते में जमा कराने और इसका सबूत पेश करने का निर्देश दिया गया है।
MNREGA Scheme में कैसे हुआ यह घोटाला?
यह पूरा मामला बेलवाड़ा निवासी हिमांशु शेखर सिंह की शिकायत के बाद सामने आया। उन्होंने आरोप लगाया था कि नाला उड़ाही के नाम पर फर्जी मास्टर रॉल बनाकर सरकारी राशि का गबन किया गया है। जांच के बाद लोकपाल ने इन आरोपों को सही पाया और योजना को नियमों के विरुद्ध बताते हुए गबन की गई राशि की वसूली की सिफारिश की। इस आदेश के खिलाफ संबंधित मनरेगाकर्मियों ने मनरेगा अपीलीय प्राधिकार, पटना में अपील भी की, लेकिन वहां भी लोकपाल के आदेश को ही सही ठहराया गया, जिससे इस मनरेगा घोटाला पर मुहर लग गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
जांच में पाया गया कि योजनाओं के कार्यान्वयन की निर्धारित पांच वर्षों की अवधि पूरी होने से पहले ही उनका नाम बदलकर और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भुगतान कर दिया गया। यह स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है और इसमें अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
इन अधिकारियों और कर्मचारियों पर गिरी गाज
लोकपाल के आदेश के अनुसार, जिन लोगों से यह राशि वसूली जानी है, उनमें तत्कालीन पंचायत रोजगार सेवक सह अभिकर्ता मिथिलेश कुमार मंडल, लेखापाल दिनेश कुमार, कनीय अभियंता हरिनारायण साहू, सहायक अभियंता राज मोहन चौधरी और तत्कालीन कार्यक्रम पदाधिकारी बबलू कुमार शामिल हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन सभी से समानुपातिक रूप से कुल राशि वसूलने का आदेश दिया गया है। कार्यक्रम पदाधिकारी को एक सप्ताह के भीतर संबंधित व्यक्तियों को आदेश की प्रति तामिला कराकर रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
बताया जाता है कि ढढ़िया पंचायत में दीपू सिंह के खेत से कामेश्वर सिंह के खेत तक और हरिवंश दास के खेत से सोभित यादव के खेत तक नाला उड़ाही के लिए करीब 19.47 लाख रुपये की योजना थी, लेकिन यह काम जमीन पर हुआ ही नहीं। इसी योजना का फर्जी मास्टर रॉल तैयार कर राशि निकाल ली गई। जांच में यह भी पाया गया कि इन अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने दायित्वों का सही से निर्वहन नहीं किया, जिसके चलते यह सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ।





