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Darbhanga/Madhubani BIG NEWS: बिजली विभाग के इंजीनियर मनोज रजक के 7 ठिकानों पर EOU का छापा, Disproportionate Assets Case में करोड़ों की बेनामी संपत्ति का खुलासा!

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Disproportionate Assets Case: सुबह की पहली किरण के साथ ही बिहार में भ्रष्टाचार की एक और बड़ी मछली कानून के जाल में फंस गई। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की टीमों ने बिजली विभाग के एक बड़े अधिकारी के कई ठिकानों पर एक साथ धावा बोला है, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया है।

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Disproportionate Assets Case में कैसे फंसे कार्यपालक अभियंता?

बिहार में आय से अधिक संपत्ति मामले को लेकर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के जयनगर में पदस्थापित कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक के कई ठिकानों पर EOU की टीम ने एक साथ छापेमारी की है। यह छापेमारी दरभंगा, मधुबनी के जयनगर और सुपौल के करजाइन समेत कुल 7 जगहों पर की जा रही है। मनोज कुमार रजक वर्तमान में जयनगर इलेक्ट्रिक सप्लाई डिवीजन में बतौर सप्लाई एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर तैनात हैं और उनका स्थायी निवास दरभंगा में है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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अधिकारियों की टीम उनके सभी ठिकानों पर संपत्ति और निवेश से जुड़े कागजातों की बारीकी से जांच कर रही है। जांच एजेंसी को संदेह है कि इस छापेमारी में बड़े पैमाने पर अवैध संपत्ति और निवेश के सबूत मिल सकते हैं। इस बड़े एक्शन के बाद बिजली विभाग के अन्य भ्रष्ट अधिकारियों में भी खलबली मची हुई है। इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। जांच एजेंसी इस भ्रष्टाचार के मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है।

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आय से 62% अधिक संपत्ति का खुलासा

आर्थिक अपराध इकाई द्वारा की गई प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक के पास उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से लगभग 62 प्रतिशत अधिक संपत्ति है। यह आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद और भी बढ़ सकता है। इस ठोस सबूत के आधार पर EOU ने उनके खिलाफ पटना स्थित थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

फिलहाल EOU की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि यह अतिरिक्त संपत्ति किन स्रोतों से अर्जित की गई है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं। खबर लिखे जाने तक सभी ठिकानों पर छापेमारी की प्रक्रिया जारी थी। अधिकारियों का कहना है कि तलाशी अभियान पूरा होने के बाद ही संपत्ति का पूरा आकलन किया जा सकेगा और कुल बेनामी संपत्ति का सही आंकड़ा सामने आएगा।

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