
Bihar Employees Strike: बिहार में एक के बाद एक सरकारी विभागों में हड़ताल से व्यवस्था चरमरा गई है। क्या नीतीश कुमार की सरकार की हनक खत्म हो गई है और सुशासन की बात अब सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है? विपक्षी दलों के साथ-साथ अब सरकार में शामिल गठबंधन के कार्यकर्ताओं में भी यह चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि बिहार में सरकार की पकड़ ढीली पड़ गई है।

लगातार हड़तालों से बिगड़े हालात
बिहार में पिछले काफी समय से विभिन्न विभागों के सरकारी कर्मी अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। 10 फरवरी से राजस्व कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, जिसके बाद 11 मार्च से अंचल अधिकारी और राजस्व पदाधिकारी भी उनके साथ जुड़ गए। इन कर्मियों की मांगों को पूरा करने के लिए सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। उप-मुख्यमंत्री सह भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा की अपीलें भी फिलहाल बेअसर साबित हुई हैं। नतीजतन, 31 मार्च तक दाखिल-खारिज, परिमार्जन और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों का अंबार लग गया है। सरकार ने तात्कालिक व्यवस्था के तौर पर प्रखंड विकास पदाधिकारियों और पंचायत सचिवों से अंचल के काम कराए, लेकिन अब बुधवार से पंचायत सचिव भी अपनी चिर-प्रतीक्षित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। यह Bihar Employees Strike अब राजस्व विभाग से निकलकर पंचायत सचिवों तक फैल गई है, जिससे सरकारी कामकाज ठप है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस कारण अब आम लोगों के विकास और कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ सामान्य कार्य भी ठप पड़ गए हैं। छात्रों को परीक्षाफल प्रकाशन के बाद नामांकन और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जरूरी आवासीय, जाति, आय एवं ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्रों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
आम जनता परेशान, नेताओं की बयानबाजी तेज
इस पूरे मामले पर सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस के पूर्वी जिला अध्यक्ष सह बेनीपुर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी मिथिलेश कुमार चौधरी का कहना है कि बिहार में सरकार नाम की कोई चीज नहीं बची है। एक तरफ आम जनता गैस की किल्लत से जूझ रही है तो दूसरी ओर किसान फसल क्षति मुआवजे और जमीन के कागजात दुरुस्त कराने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। ऐसे में पंचायत सचिवों की हड़ताल ने “नीम पर करेला” का काम किया है, जिससे लाखों बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रखंड अध्यक्ष नीलांबर यादव ने कहा कि किसी भी सरकारी कार्यालय में कोई अधिकारी या कर्मचारी उपलब्ध नहीं है, जिससे आम लोगों के रोजमर्रा के कार्य ठप पड़े हैं। उनका आरोप है कि सरकार सत्ता हस्तांतरण के बीच आपसी खींचतान में लगी हुई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
समाधान की राह पर सरकार?
वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश झा और अनिल कुमार झा ने मौजूदा स्थिति को लेकर अलग राय रखी। उनका कहना है कि सरकारी कर्मियों की हड़ताल और असंतोष कोई नई बात नहीं है। उन्होंने राजद शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि तब वित्तीय स्थिति खराब होने पर तीन-तीन महीने तक हड़तालें होती थीं और कर्मियों को सिर्फ 10 रुपये डीए वृद्धि मिलती थी। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार न्याय के साथ विकास और सुशासन की सरकार है। उनके अनुसार, विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं में कोई बाधा नहीं है और सरकार जल्द ही सभी समस्याओं का समाधान कर कर्मियों को काम पर लौटाएगी। लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के प्रखंड अध्यक्ष समशूल होदा ने भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की पकड़ जरूर ढीली नजर आ रही है। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द सरकारी कर्मियों की हड़ताल खत्म कर जनजीवन को पटरी पर लाने की अपील की है। फिलहाल इस Bihar Employees Strike के समाधान को लेकर सरकार और कर्मचारी संघों के बीच बातचीत जारी है।देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें








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