



Shastra Competition: ज्ञान के महासागर में गोते लगाने और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिए बिहार-झारखंड के भविष्य के कर्णधार दरभंगा की धरती पर जुटे। मौका था कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय और नई दिल्ली स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय शास्त्र स्पर्धा का, जहां युवा विद्वानों ने अपनी मेधा का परचम लहराया।
विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पांडेय की अध्यक्षता में हुआ। इस अवसर पर वक्ताओं ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यातिथि के रूप में प्रो. सुरेश्वर झा ने शास्त्रीय अध्ययन की गहराइयों और इसकी महत्ता पर प्रकाश डाला, जबकि सारस्वत अतिथि और डीन प्रो. पुरेन्द्र वारिक ने इस तरह की स्पर्धाओं की प्रासंगिकता और विशेषताओं पर विस्तार से अपनी बात रखी। कार्यक्रम का सफल संयोजन एवं संचालन व्याकरण विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. यदुवीरस्वरूप शास्त्री द्वारा किया गया।
Shastra Competition में इन विधाओं में हुई टक्कर
इस दो दिवसीय ज्ञान यज्ञ में प्रतिभागियों के बीच कई शास्त्रीय विधाओं में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य छात्रों के भीतर छिपी शास्त्रीय प्रतिभा को एक मंच प्रदान करना था। प्रमुख स्पर्धाओं में शामिल थे:
- ज्योतिष शलाका एवं भगवद्गीता कण्ठपाठ
- काव्य शलाका, सुभाषित कण्ठपाठ एवं काव्य कण्ठपाठ
- व्याकरण शलाका एवं अष्टाध्यायी कण्ठपाठ
- धातुरूप कण्ठपाठ एवं अमरकोष कण्ठपाठ
- विभिन्न विषयों पर भाषण प्रतियोगिता जैसे- व्याकरण, साहित्य, वेद भाष्य, भारतीय विज्ञान, आयुर्वेद, धर्मशास्त्र, ज्योतिष, सांख्य–योग, न्याय, मीमांसा एवं वेदान्त भाषण।
इन सभी प्रतियोगिताओं में छात्रों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
समापन समारोह में विजेताओं का हुआ सम्मान
प्रतियोगिता के समापन समारोह की अध्यक्षता भी कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पाण्डेय ने की। कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रामचन्द्र झा मौजूद रहे। उन्होंने अपने संबोधन में छात्रों को प्रोत्साहित किया। वहीं, विशिष्ट अतिथि कुलसचिव प्रो. ब्रजेशपति त्रिपाठी ने भी बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि ऐसी स्पर्धाओं में पूरी गंभीरता से भाग लेना चाहिए, क्योंकि यही अनुभव भविष्य की नींव रखता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सारस्वत अतिथि डीन प्रो. पुरेन्द्र वारिक ने भी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
समापन कार्यक्रम का सह–संयोजन एवं संचालन ज्योतिष विभाग के डॉ. अवधेश कुमार श्रोत्रिय ने किया। सभी अतिथियों ने इस आयोजन को शास्त्रीय प्रतिभा के विकास की दिशा में एक अत्यंत उपयोगी कदम बताते हुए आयोजकों और प्रतिभागियों की जमकर सराहना की। अंत में, सफल प्रतिभागियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए नकद राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया, ताकि उनका मनोबल और भी बढ़ सके।

