बिहार न्यूज़: अपनी पुश्तैनी जमीन गंवाने वाले रैयतों के लिए अब एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सरकार ने भूमि अधिग्रहण मुआवजे के नियमों में ऐसा बदलाव किया है, जिससे अब उन्हें अपनी जमीन के बदले कहीं ज्यादा बेहतर रकम मिलेगी। जानिए क्या है यह नया फॉर्मूला और कैसे बदलेगा यह हजारों परिवारों का भविष्य।
बिहार में विकास परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। अक्सर रैयतों को मिलने वाले मुआवजे को लेकर असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं। लेकिन अब बिहार सरकार ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है, जिससे जमीन मालिकों को बड़ी राहत मिलने वाली है।
ताजा जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के लिए मुआवजे की दर तय करने के तरीके में बदलाव किया है। इस नए नियम के लागू होने के बाद, उन सभी रैयतों को फायदा होगा जिनकी जमीनें सरकारी परियोजनाओं जैसे सड़क, पुल, नहर या अन्य विकास कार्यों के लिए ली जा रही हैं। यह फैसला जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को अधिक न्यायसंगत और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
मुआवजे का नया अध्याय
पहले, जमीन अधिग्रहण के मामले में मुआवजे का निर्धारण कई बार बाजार मूल्य से कम होने की शिकायतें आती थीं, जिससे जमीन मालिकों में नाराजगी पैदा होती थी। नए प्रावधानों के तहत, मुआवजे की गणना अब इस तरह से की जाएगी जिससे रैयतों को अपनी जमीन का उचित और सम्मानजनक मूल्य मिल सके। यह निश्चित रूप से उन लोगों के लिए एक ‘खुशखबरी’ है जो लंबे समय से बेहतर मुआवजे की मांग कर रहे थे।
इस फैसले का सीधा असर उन हजारों परिवारों पर पड़ेगा जिनकी आजीविका जमीन पर निर्भर करती है। बढ़ा हुआ मुआवजा उन्हें विस्थापन के बाद एक नया जीवन शुरू करने और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद करेगा। यह निर्णय बिहार में भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवादों को कम करने और परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने में भी सहायक हो सकता है।
क्या बदलेगा अब?
हालांकि, नए मुआवजे की गणना का विस्तृत फॉर्मूला और इसके सटीक आंकड़े अभी सामने नहीं आए हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि सरकार का उद्देश्य रैयतों के हितों की रक्षा करना है। उम्मीद है कि इसमें बाजार मूल्य, जमीन के प्रकार, उसकी लोकेशन और अन्य महत्वपूर्ण कारकों को ध्यान में रखा जाएगा, ताकि उन्हें पहले से कहीं अधिक बेहतर भुगतान मिल सके।
सरकार के इस कदम से न केवल जमीन मालिकों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि भविष्य में होने वाले भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी अपेक्षाकृत सुचारु होने की उम्मीद है। यह राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास को गति देगा और साथ ही आम जनता के बीच सरकार की छवि को भी बेहतर बनाएगा।







