
Bihar Land News: बिरौल दरभंगा देशज टाइम्स।जीवन की डोर जब आपदा के चक्रव्यूह में उलझ जाती है, तब उम्मीद की किरण सरकारी मदद से ही फूटती है। अपने घर और जमीन की आस में भटकते परिवारों के लिए बसगीत पर्चा महज एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक है। बिरौल, किरतपुर प्रखंड के नरकटिया भंडरिया पंचायत भूभौल से दर्जनों महादलित और भूमिहीन महिलाओं का एक समूह गुरुवार को अनुमंडल मुख्यालय पहुंचा। उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बसगीत पर्चा और स्थायी आवास की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की।
इन महिलाओं का कहना है कि पिछले वर्ष 29 सितंबर को आई विनाशकारी बाढ़ ने उनके गांव में तटबंध को तोड़ दिया था, जिसके परिणामस्वरूप भारी तबाही हुई। बाढ़ के पानी ने कई घरों को अपनी चपेट में ले लिया और दर्जनों परिवारों को बेघर कर दिया।
महादलित परिवारों की ‘Bihar Land News’ से जुड़ी अनकही व्यथा
बाढ़ के बाद से, अधिकांश महादलित परिवार दूसरों की जमीनों पर या फिर नदी तटबंध के किनारे अस्थायी रूप से डेरा डाले हुए हैं। उनका एकमात्र सहारा, यह तटबंध भी धीरे-धीरे कमजोर होता जा रहा है, जिससे उनके सिर पर एक और खतरे की तलवार लटकी हुई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
प्रदर्शन में शामिल कलियां देवी, हकरी देवी, मादो देवी, अनिता देवी, जगतारणी देवी और ममता देवी जैसी महिलाओं ने बताया कि उनके पास रहने के लिए एक इंच भी अपनी जमीन नहीं है। वे पूरी तरह से भूमिहीन हैं और हर दिन अनिश्चितता में जी रही हैं। इन परिवारों के लिए अपने भूमि अधिकार प्राप्त करना अत्यंत आवश्यक है।
महिलाओं ने प्रशासन से भावुक अपील की कि उन्हें बसने के लिए उचित भूमि आवंटित की जाए और जल्द से जल्द बसगीत पर्चा जारी किया जाए। उनका मानना है कि इससे वे अपने सपनों का घर बना सकेंगी और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ सकेंगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
प्रशासन का आश्वासन और आगे की राह
इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए, अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने मुख्यालय पहुँची सभी भूमिहीन महिलाओं को ऑनलाइन आवेदन करने का निर्देश दिया। यह कदम उनके भूमि अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में पहला कदम है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक इन जरूरतमंद परिवारों को उनका हक दिला पाता है और उन्हें स्थायी छत प्रदान कर पाता है, ताकि वे भी सम्मानजनक जीवन जी सकें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।






