



Bihar Rajasva Karmachari Strike: सरकार और कर्मचारियों के बीच मांगों की रस्साकशी ने एक बार फिर आम आदमी को बीच मझधार में ला खड़ा किया है। बेनीपुर में अंचल और राजस्व अधिकारियों की हड़ताल खत्म होते ही अब राजस्व कर्मचारियों ने अपनी 17-सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है, जिससे सरकारी दफ्तरों में एक बार फिर ताले लटक गए हैं और किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं।
बुधवार से शुरू हुई इस हड़ताल के कारण किसान आईडी निर्माण, दाखिल-खारिज, परिमार्जन और अन्य सभी भू-अभिलेख से जुड़े काम पूरी तरह से ठप्प पड़ गए हैं। यह कोई पहली बार नहीं है जब कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, चुनाव से पहले भी इन्हीं मांगों को लेकर हड़ताल हुई थी, तब सरकार ने जल्द विचार करने का आश्वासन देकर मामला शांत करा दिया था। लेकिन छह महीने बीत जाने के बाद भी जब मांगें पूरी नहीं हुईं, तो कर्मचारियों ने फिर से हड़ताल का रास्ता अख्तियार कर लिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Bihar Rajasva Karmachari Strike: जानिए क्या हैं राजस्व कर्मचारियों की प्रमुख मांगें?
राजस्व कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी बुनियादी जरूरतों और हकों के लिए आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी अनदेखी कर रही है। उनकी 17-सूत्री मांगों में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं, जो सीधे तौर पर उनके काम और भविष्य से जुड़े हैं। कर्मचारियों की कुछ प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- गृह जिले में पदस्थापना को सुनिश्चित करते हुए जिला संवर्ग को अक्षुण्ण रखा जाए।
- ग्रेड पे को 1900 से बढ़ाकर 2800 रुपये किया जाए।
- एसीपी (Assured Career Progression) और एमएसीपी (Modified Assured Career Progression) का लाभ दिया जाए।
- कंप्यूटर और अमानत की ट्रेनिंग की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए।
- पदनाम में सम्मानजनक परिवर्तन किया जाए।
- अतिरिक्त हल्के के प्रभाव से कर्मचारियों को मुक्त किया जाए।
- पुरानी पेंशन व्यवस्था को फिर से बहाल किया जाए।
- कार्य के दौरान सुरक्षा की गारंटी दी जाए और किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर तत्काल रोक लगे।
इन मांगों को लेकर कर्मचारी इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में दिख रहे हैं।
कामकाज ठप्प, किसानों की बढ़ी मुश्किलें
एक तरफ अंचल और राजस्व अधिकारियों की हड़ताल 10 फरवरी को समाप्त हुई ही थी कि 11 फरवरी से राजस्व कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से आम लोगों, खासकर किसानों की मुश्किलें दोगुनी हो गई हैं। जमीन से जुड़े कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे किसानों को अब अनिश्चितकाल तक इंतजार करना पड़ सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जमीन के कागजातों और भू-अभिलेख संबंधी कार्यों का रुक जाना उनके लिए एक बड़ी समस्या का सबब बन गया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
इस पूरे मामले पर जब राजस्व अधिकारी वरुण कुमार से बात की गई, तो उन्होंने बताया, “राजस्व कर्मचारियों ने आज से हड़ताल की घोषणा की है। हालांकि, आईडी बनाने का काम निरंतर जारी है। आगे के कार्यों के लिए हम सरकार और उच्च अधिकारियों के निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं और उसी के अनुसार काम किया जाएगा।” इस बयान से साफ है कि जब तक सरकार और कर्मचारियों के बीच कोई सुलह नहीं हो जाती, तब तक स्थिति जस की तस बनी रहेगी और इसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।





