
Darbhanga News: कभी-कभी कानों-सुनी बातें आंखों-देखे सच पर इतनी भारी पड़ जाती हैं कि बनते-बनते रिश्ते भी बिखर जाते हैं। बिहार के दरभंगा जिले के सिंहवाड़ा से एक ऐसा ही दिलचस्प मामला सामने आया है, जहां एक अफवाह ने शादी के रंग में ऐसा भंग डाला कि दूल्हे को बिना दुल्हन के ही बैरंग लौटना पड़ा।
सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र के कलिगांव में 11 मार्च की शाम मंगल गीतों की गूंज थी और हर कोई मोरो गांव से आने वाली बारात का बेसब्री से इंतजार कर रहा था। गाजे-बाजे के साथ नाचते-गाते बाराती जैसे ही दुल्हन के दरवाजे पर पहुंचे, उनका भव्य स्वागत किया गया। पंडाल में बारातियों की खूब आवभगत हुई, लेकिन इस खुशनुमा माहौल पर जल्द ही किसी की नजर लग गई।

जब दूल्हे को शादी की रस्मों के लिए मंडप में ले जाया गया, तभी किसी रिश्तेदार ने यह अफवाह फैला दी कि लड़के की शादी तो पहले ही राजस्थान में हो चुकी है। यह सुनते ही लड़की पक्ष में हड़कंप मच गया और दुल्हन ने शादी से साफ इनकार कर दिया। इस अप्रत्याशित शादी में हंगामा होते ही खाना खा रहे बारातियों में भगदड़ मच गई और कई लोग मौके से भाग निकले। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ग्रामीणों ने दूल्हे, उसके पिता और कुछ प्रमुख परिजनों को रोक लिया।

Darbhanga News: जानिए क्या थी दूल्हे से जुड़ी वो अफवाह
मामला बिगड़ने के बाद 12 मार्च की सुबह पंचायत बैठी। दूल्हे के पिता को शादी समारोह में हुए खर्च की पूरी रकम चुकानी पड़ी, जिसके बाद वे बिना दुल्हन के मायूस होकर अपने घर लौट गए। दिन भर कलिगांव से लेकर मोरो गांव तक यह घटना चर्चा का विषय बनी रही। जब क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने मामले की तहकीकात की, तो सच्चाई कुछ और ही निकली।
पता चला कि लड़का करीब चार साल पहले राजस्थान की एक कंपनी में काम करता था, जहां उसे एक लड़की से प्रेम हो गया था। दोनों एक महीने तक साथ भी रहे, लेकिन फिर लड़की उसे छोड़कर चली गई। इसी धोखे के बाद से लड़का शादी के लिए तैयार नहीं हो रहा था। इसी पुरानी घटना को किसी ने तोड़-मरोड़कर अफवाह के रूप में फैला दिया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
बुजुर्गों की पहल से फिर जुड़ीं दिलों की डोरियां
सच्चाई सामने आने के बाद गांव के बड़े-बुजुर्गों ने मोर्चा संभाला। उन्होंने दोनों परिवारों के बीच की गलतफहमी को दूर किया। 12 मार्च की देर शाम मोरो गांव जाकर दूल्हे और उसके परिवार को पूरे आदर-सम्मान के साथ वापस कलिगांव बुलाया गया। एक बार फिर से मेहमानों के लिए खाने-पीने का शानदार प्रबंध किया गया।
देर रात शादी की अधूरी रस्में पूरी की गईं और आखिरकार शुक्रवार की सुबह धूमधाम और गाजे-बाजे के साथ दुल्हन की विदाई संपन्न हुई। जिस घर से एक दिन पहले बारात बैरंग लौटी थी, वहीं से अगले दिन खुशियों के साथ डोली उठी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि सूझबूझ और संवाद से बड़ी से बड़ी मुश्किल को भी हल किया जा सकता है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



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